- सदर अस्पताल की एंबुलेंस में लादकर कोर्ट रोड ले जाई गई मशीन
Jamtara News : झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के विधानसभा क्षेत्र जामताड़ा में सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है. जिले में गंभीर मरीजों को समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने की शिकायतें अक्सर सामने आती रही हैं. कभी घायल मरीज ट्रैक्टर से अस्पताल पहुंचते हैं, तो कभी टोटो और ऑटो ही उनके लिए एंबुलेंस का विकल्प बन जाते हैं. अब सदर अस्पताल की सरकारी एंबुलेंस में एक्स-रे मशीन लादकर ले जाने का मामला सामने आया है.
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आरोप है कि अस्पताल की एक्स-रे मशीन को कोर्ट रोड स्थित किसी निजी कार्य के लिए ले जाया गया. इस दौरान अस्पताल के एक्स-रे टेक्नीशियन किरण कुमार भी मौजूद थे. जिस एंबुलेंस का इंतजार गंभीर मरीज करते हैं, उसी में मरीजों की जांच करने वाली मशीन को सवारी मिल गई.
सरकारी व्यवस्था पर सवाल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सदर अस्पताल में आम और गरीब मरीजों की जांच के लिए उपलब्ध एक्स-रे मशीन को एंबुलेंस में लादकर अस्पताल परिसर से बाहर ले जाया गया. यदि उसी दौरान किसी गंभीर मरीज को एक्स-रे जांच की जरूरत पड़ती, तो उसकी जांच कैसे होती? क्या मरीज को मशीन के लौटने तक इंतजार करना पड़ता या फिर उसे किसी निजी जांच केंद्र का रास्ता दिखाया जाता?
अस्पताल के चिकित्सा संसाधन मरीजों की सुविधा के लिए होते हैं. ऐसे में मशीन को अस्पताल से बाहर ले जाने का उद्देश्य क्या था, किस अधिकारी की अनुमति से उसे ले जाया गया और इसके लिए कोई लिखित आदेश जारी हुआ था या नहीं, यह जांच का विषय है.
टेक्नीशियन बोला- मरम्मत के लिए ले जा रहे थे मशीन
मशीन को एंबुलेंस से उतारने के दौरान एक्स-रे टेक्नीशियन किरण कुमार ने बताया कि मशीन को मरम्मत के लिए ले जाया गया था. उनका यह बयान सामने आने के बाद मामला और महत्वपूर्ण हो गया है. यदि मशीन खराब थी और उसे मरम्मत के लिए भेजा जा रहा था, तो क्या अस्पताल प्रबंधन को इसकी जानकारी थी? मशीन को मरम्मत के लिए भेजने की अनुमति किसने दी? क्या संबंधित एजेंसी या मरम्मत केंद्र का कोई दस्तावेज उपलब्ध है? मशीन को कहां ले जाया गया और मरम्मत की प्रक्रिया क्या थी?
उपाधीक्षक को मामले की जानकारी नहीं
इस संबंध में पूछे जाने प सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. प्रभात सिन्हा ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नही है. अब जब आप () माध्यम से पता चला है, तो इस संबंध में संबंधित लोगों से पूछताछ की जाएगी. अब सवाल उठता है कि यदि मशीन मरम्मत के लिए ले जाई जा रही थी, तो अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी? अस्पताल के महत्वपूर्ण उपकरणों की आवाजाही का रिकॉर्ड कौन रखता है? सरकारी एंबुलेंस में मशीन ले जाने की अनुमति किस स्तर पर दी गई?
डीसी ने कहा- यह गंभीर मामला, कार्रवाई का दिया भरोसा
मामला डीसी आलोक कुमार के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने इसे गंभीर बताया और कार्रवाई की बात कही. अब निगाहें जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं. डीसी के संज्ञान के बाद अब देखना होगा कि जांच केवल जानकारी लेने तक सीमित रहती है या सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल की पूरी प्रक्रिया सामने लाकर जिम्मेदारी भी तय की जाती है.
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