Jamtara : जिला प्रशासन लाखों रुपये खर्च कर "नशा मुक्ति अभियान" चलाने का दावा करती है. वहीं सरकारी कार्यालयों की हालत प्रशासन के इन दावों की पोल खोल रही है. नारायणपुर प्रखंड कार्यालय की दीवारों पर जगह-जगह गुटखा और पान के दाग साफ बताते हैं कि सरकारी दफ्तरों में नशा व गुटखा के सेवन पर रोक के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं.

इसे भी पढ़े...
प्रखंड कार्यालय की दीवारें वर्षों से गुटखे और पान से रंगी हैं. वहीं कार्यालय परिसर में सफाई व्यवस्था बदहाल है. जब सरकारी कर्मचारी और यहां आने वाले लोग सार्वजनिक संपत्ति को गंदा करने से नहीं चूक रहे, तो आम जनता से स्वच्छता और नशामुक्त समाज की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
प्रशासन से सवाल है कि क्या नशा मुक्ति अभियान केवल रैली, शपथ और फोटो सेशन तक सीमित है? अभियान वास्तव में प्रभावी होता, तो सबसे पहले सरकारी कार्यालयों में तंबाकू और गुटखा सेवन पर पूरी तरह रोक दिखाई देती.
जिले के उपायुक्त व प्रखंड प्रशासन रोजाना स्वच्छता और अनुशासन की बातें करते हैं, लेकिन नारायणपुर प्रखंड कार्यालय की तस्वीरें सरकारी दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही हैं. प्रशासन अपने ही कार्यालय को गुटखे की पीक से नहीं बचा पा रहा है, तो पूरे जिले को नशामुक्त बनाने का दावा कितना वास्तविक है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.
अब इन तस्वीरों के सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों की नींद खुलती है या नहीं, या मामला अन्य सरकारी दावों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा. जनता को उम्मीद है कि केवल अभियान चलाने के बजाय दोषियों पर कार्रवाई होगी और सरकारी कार्यालयों को स्वच्छ व तंबाकू मुक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें


Leave a Comment