- खबर छपने के बाद पांच दिन तक थमा रहा बालू का खेल
- शनिवार रात से फिर शुरू हुआ अवैध बालू का परिवहन
- रात के अंधेरे में 70-80 ट्रैक्टर दौड़ने का दावा
Jamtara News: जिले के करमाटांड़ थाना क्षेत्र में बालू के कथित अवैध परिवहन का दौर बदस्तूर जारी है. ‘लगातार न्यूज’ में खबरें प्रकाशित होने के बाद पांच दिनों तक बालू का परिचालन बंद रहा, लेकिन शनिवार से एक बार फिर ट्रैक्टरों से अवैध बालू की आवाजाही शुरू होने की बात सामने आई है. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर बालू परिवहन पर रोक लगाने की कार्रवाई कितने दिनों तक टिकती है और प्रखंड टास्क फोर्स की निगरानी जमीन पर कहां नजर आती है?
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स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार, कोरो थाना क्षेत्र की जयंती नदी के मदनकट्टा, डहुवा और धनतरिया घाटों से प्रतिदिन करीब 70 से 80 ट्रैक्टरों के जरिए बालू का परिवहन किया जा रहा है. बताया जाता है कि रात करीब नौ बजे से सुबह पांच बजे तक ट्रैक्टर कलाझेरिया, सकलपुर, कदररुडीह, तेतुलबांधा और करमाटांड़ बाजार होते हुए गुजरते हैं. यदि इन दावों में सच्चाई है, तो रात के अंधेरे में इतने बड़े पैमाने पर बालू का परिवहन होना संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
पांच दिन की खामोशी, फिर वही पुरानी कहानी!
बालू परिवहन को लेकर ‘लगातार न्यूज’ में खबरें प्रकाशित हुईं, तो पांच दिनों तक ट्रैक्टरों की आवाजाही बंद रही. इससे लगा कि शायद प्रशासन की सख्ती का असर दिखने लगा है. लेकिन शनिवार से फिर अवैध बालू का परिवहन शुरू होने की सूचना के बाद प्रशासन के ढीला-ढाला रवैये को लेकर क्षेत्र में चर्चा शुरू हो गई है. लोगों का कहना है कि आखिर यह कार्रवाई का असर था या महज कुछ दिनों का विराम? अगर नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो स्थायी रोक लगाने की जिम्मेदारी किसकी है?
टास्क फोर्स की निगरानी पर सवाल
प्रखंड स्तर पर टास्क फोर्स का गठन अवैध खनन और परिवहन पर रोक लगाने के उद्देश्य से किया जाता है. ऐसे में सवाल है कि रात 9 बजे से सुबह 5 बजे तक कथित तौर पर दर्जनों ट्रैक्टर सड़कों से गुजर रहे हैं, तो उनकी जांच कौन कर रहा है? क्या संबंधित मार्गों पर नियमित निगरानी हो रही है? यदि कार्रवाई हो रही है, तो बालू परिवहन दोबारा शुरू होने की नौबत क्यों आ रही है?
मामला केवल बालू की ढुलाई का नहीं, बल्कि नियमों के पालन और प्रशासनिक जवाबदेही का भी है. एनजीटी के नियमों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है. लोगों का कहना है कि मदनकट्टा, डहुवा और धनतरिया घाटों से लेकर करमाटांड़ बाजार तक के मार्गों की जांच कराई जाए और अवैध परिवहन की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए.
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