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Jamtara News : चाचा की मौत से छूटा सहारा, पांच बहनों ने दिया अर्थी को कंधा

जामताड़ा जिले के करमाटांड़ में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक मार्मिक घटना सामने आई है. माता-पिता के निधन के बाद जिन पांच बहनों का एकमात्र सहारा उनके चाचा थे, उनके भी निधन के बाद बेटियों को ऐसा दर्द झेलना पड़ा जिसने समाज और प्रशासन दोनों की संवेदनहीनता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया.
 

Jamtara: जामताड़ा जिले के करमाटांड़ में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक मार्मिक घटना सामने आई है. माता-पिता के निधन के बाद जिन पांच बहनों का एकमात्र सहारा उनके चाचा थे, उनके भी निधन के बाद बेटियों को ऐसा दर्द झेलना पड़ा जिसने समाज और प्रशासन दोनों की संवेदनहीनता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया.

 

रविवार देर रात 55 वर्षीय ठाकुर प्रसाद साह का निधन हो गया. वे फल बेचकर किसी तरह अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे. वर्ष 2013 में पिता और 2017 में मां के निधन के बाद वही पांचों बहनों के लिए सहारा बने हुए थे. लेकिन उनके निधन के बाद जब अंतिम यात्रा निकालने का समय आया, तब न समाज आगे आया और न ही आसपास के लोग.

 

मजबूर होकर पांचों बहनों-  रुबी, मौसम, चंदा, तन्नू और रिमझिम कुमारी ने खुद अपने चाचा के शव को कंधा दिया. करमाटांड़ बाजार से श्मशान घाट तक बहनें पैदल शव लेकर पहुंचीं. सबसे छोटी बहन तन्नू ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूरी कीं.

 

श्मशान घाट तक जाते हुए यह दृश्य हर किसी की आंखें नम कर गया. एक तरफ बेटियों का साहस, जिम्मेदारी और आत्मबल दिखाई दिया, तो दूसरी ओर समाज की बेरुखी और प्रशासनिक संवेदनहीनता भी उजागर हो गई.

 

रिमझिम कुमारी ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है. पांचों बहनें दो कमरों के जर्जर घर में रहती हैं, जिसकी छत एस्बेस्टस की है. घर में शौचालय और स्नानघर तक की सुविधा नहीं है. परिवार के पास लगभग 25 बकरियां हैं, जिनसे किसी तरह जीवनयापन हो रहा है. हालात इतने खराब हैं कि एक ही कमरे में बहनें और बकरियां साथ रहती हैं.

 

बहनों का कहना है कि चाचा के निधन के बाद उन्होंने पड़ोसियों और समाज के लोगों से अंतिम यात्रा में शामिल होने और श्मशान घाट चलने की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने मदद के लिए हाथ नहीं बढ़ाया. 

 

आखिरकार पांचों बहनों ने खुद अपने चाचा को अंतिम विदाई देने का फैसला किया. यह घटना उन तमाम दावों की भी पोल खोलती है, जहां बड़े मंचों से समाज सेवा और जरूरतमंदों की मदद की बातें की जाती हैं. जब वास्तव में सहारे की जरूरत पड़ी, तब ये पांच बेटियां ही अपने परिवार का सहारा बनकर सामने आईं.

 

इधर, करमाटांड़ प्रखंड विकास पदाधिकारी नुपुर कुमारी ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि प्रशासन इस घटना का संज्ञान ले रहा है और जल्द ही बहनों की समस्याओं के समाधान का प्रयास किया जाएगा.

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