Jamtara: हूल दिवस पर जामताड़ा प्रखंड के अमलाबनी रामपुर चौक टोला स्थित सिदो-कान्हू चौक पर समारोह आयोजित किया गया. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने राज्य में आदिवासियों और मूलवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक बार फिर "हूल क्रांति" की आवश्यकता बताई. जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा आज सबसे बड़ी चुनौती बन गई है. इसके लिए व्यापक जनजागरण व लोकतांत्रिक संघर्ष जरूरी है.
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समारोह को संबोधित करते हुए चंपई सोरेन ने आरोप लगाया कि संथाल परगना सहित पूरे झारखंड में आदिवासियों की जमीनों पर लगातार अवैध कब्जे हो रहे हैं, लेकिन राज्य की गठबंधन सरकार इस गंभीर मुद्दे पर मूकदर्शक बनी हुई है.
वीर शहीद सिद्धू मुर्मू, कान्हू मुर्मू, चांद मुर्मू, भैरव मुर्मू, फूलो मुर्मू और झानो मुर्मू की जन्मस्थली भोगनाडीह में ग्रामीणों द्वारा आयोजित कार्यक्रम को प्रशासन ने रोक दिया. उनका आरोप था कि पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर 51 मजिस्ट्रेट तैनात किए गए. उन्होंने कहा कि सरकार हूल दिवस के गौरवशाली इतिहास और शहीदों की विरासत को दबाने का प्रयास कर रही है.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि 1855 की हूल क्रांति ने अंग्रेजी शासन की नींव हिला दी थी और इसी संघर्ष के परिणामस्वरूप संथाल परगना की पहचान बनी और एसपीटी एक्ट (Santhal Pargana Tenancy Act) अस्तित्व में आया. उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड राज्य गठन के बाद भी इस कानून का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो सका, जिसके कारण आदिवासी समाज अपनी जमीन और अधिकारों को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहा है.
चंपई सोरेन ने दावा किया कि केवल पाकुड़ जिले में ही 15 हजार एकड़ से अधिक आदिवासी भूमि पर अवैध कब्जा हो चुका है, जबकि पूरे संथाल परगना और राज्य के अन्य हिस्सों में भी यही स्थिति है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रिम्स-2 परियोजना के लिए नगड़ी क्षेत्र में ग्रामसभा की अनुमति के बिना जमीन की घेराबंदी की जा रही है, जो आदिवासी अधिकारों का उल्लंघन है.
इससे पहले आदिवासी सवता सुसार अखाड़ा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि चंपई सोरेन ने सिद्धू-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की. ग्रामीणों ने पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों के साथ उनका स्वागत किया.कार्यक्रम में मंगल सोरेन, उत्तम हेम्ब्रम, सोनमुनि हेम्ब्रम, बीता हांसदा, सुनील हांसदा, मुखिया निर्मला सोरेन, दारा सिंह हेम्ब्रम, लालेश हेम्ब्रम, अर्जुन सोरेन, सुखेंद्र टुडू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे.
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