Jamtara News : जामताड़ा जिला मुख्यालय में बैठक होती है, निर्देश जारी होते हैं और अफसरों को जिम्मेदारी सौंपी जाती है. उन्हें एनजीटी के नियमों का हवाला देकर अवैध खनन व परिवहन पर रोक लगाने की बात कही जाती है. लेकिन कर्माटांड़ में तस्वीर कुछ ऐसी नजर आ रही है, मानो आदेश कागज में ही दफन हैं. यहां अवैध बालू लदे ट्रैक्टर फर्राटे भर रहे हैं.
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डीसी आलोक कुमार की अध्यक्षता में बुधवार को जिला टास्क फोर्स की बैठक हुई थी. बैठक में सभी थाना प्रभारियों और सीओ को अपने-अपने क्षेत्र में अवैध खनन एवं परिवहन पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया था. एनजीटी के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने की भी बात कही गई थी. लेकिन बैठक के अगले ही दिन कर्माटांड़ थाना क्षेत्र में बालू लदे ट्रैक्टरों के परिचालन की सूचना ने प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय सूत्रों के अनुसार, करों की ओर से अवैध बालू लदे करीब 30 व मदनकट्टा, कालाझरिया और सकलपुर होकर करीब 40 ट्रैक्टरों की आवाजाही देखी गई.



अवैध बालू लदे ट्रैक्टर
सूत्रों का दावा है कि जयंती नदी से बालू उठाकर कर्माटांड़ क्षेत्र में खपाया जा रहा है. अब सवाल यह है कि जब डीसी का आदेश बुधवार को जारी हुआ, तो गुरुवार को ही उसकी जमीनी हकीकत इतनी अलग कैसे दिखने लगी? क्या आदेश की भनक ट्रैक्टरों तक नहीं पहुंची, या फिर कार्रवाई करने वालों तक ट्रैक्टरों की खबर नहीं पहुंची? कागज पर सख्ती और सड़क पर बालू का खेल. आखिर कर्माटांड़ में किसकी चल रही है? प्रशासन चाहे तो इसका जवाब कार्रवाई से दे सकता है.
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