Jamtara News: जिस करमाटांड़ की पहचान लंबे समय तक साइबर अपराध के मामलों को लेकर चर्चा में रही, उसी धरती से अब खेल प्रतिभाओं की ऐसी कहानी सामने आई है, जो पूरे जिले के लिए गर्व का विषय बन गयी है. करमाटांड़ की दो बेटियों पूर्णिमा कुमारी और लक्ष्मी कुमारी ने अपनी मेहनत और संघर्ष के दम पर क्रिकेट की दुनिया में बड़ी छलांग लगायी है. दोनों खिलाड़ियों का चयन बीसीसीआई अंडर-19 स्टेट चैंपियनशिप टी-20 सत्र 2026-27 के लिए हुआ है. दोनों खिलाड़ी देवघर जिला क्रिकेट संघ की ओर से प्रतियोगिता में अपना प्रदर्शन करेंगी.
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि दोनों खिलाड़ी ऐसे परिवारों से आती हैं, जहां क्रिकेट के लिए महंगे संसाधन जुटाना आसान नहीं था. एक के पिता मुर्गा बेचकर परिवार चलाते हैं, तो दूसरी के पिता होटल में खाना बनाने का काम करते हैं. सीमित आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद दोनों ने अपने सपनों को कमजोर नहीं पड़ने दिया. मैदान पर घंटों पसीना बहाया और धीरे-धीरे अपनी प्रतिभा को मुकाम तक पहुंचाया.
पूर्णिमा कुमारी दाएं हाथ की बल्लेबाज हैं. उनके पिता हरिनारायण मंडल मुर्गा बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं. घर की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के बावजूद पूर्णिमा का क्रिकेट के प्रति जुनून लगातार बढ़ता गया. संसाधनों की कमी उनके रास्ते में जरूर आयी, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया.
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लगातार अभ्यास और अनुशासन के साथ पूर्णिमा ने अपनी बल्लेबाजी को मजबूत किया. स्थानीय स्तर से शुरू हुआ उनका सफर अब राज्य स्तरीय प्रतियोगिता तक पहुंच गया है. बीसीसीआई अंडर-19 स्टेट चैंपियनशिप के लिए चयन उनके संघर्ष और मेहनत का परिणाम माना जा रहा है.
लक्ष्मी कुमारी की कहानी भी संघर्ष से कम नहीं है. उनके पिता तुलसी मंडल होटल में खाना बनाने का काम करते हैं. परिवार की सीमित आमदनी के बीच लक्ष्मी ने क्रिकेट को अपना लक्ष्य बनाया और लगातार अभ्यास करती रहीं.
लक्ष्मी दाएं हाथ की ऑफ स्पिन गेंदबाज हैं. अपनी गेंदबाजी की प्रतिभा के दम पर उन्होंने देवघर जिला क्रिकेट संघ की टीम में जगह बनाई. अब उन्हें राज्य स्तरीय मंच पर अपनी गेंदबाजी का हुनर दिखाने का अवसर मिला है.
दोनों खिलाड़ियों की सफलता के पीछे संघर्ष का एक और अध्याय है. जामताड़ा की रहने वाली होने के बावजूद उन्हें अपने गृह जिले की टीम से खेलने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल सका. क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े विवाद के दौर में दोनों खिलाड़ियों के सामने आगे बढ़ने का रास्ता सीमित हो गया.
ऐसे समय में दोनों ने हार मानने के बजाय देवघर जिला क्रिकेट संघ का रुख किया. वहां उन्हें खेलने और अपनी प्रतिभा साबित करने का अवसर मिला. लगातार प्रदर्शन करते हुए दोनों ने अपनी जगह मजबूत की और अब बीसीसीआई की अंडर-19 स्टेट चैंपियनशिप तक पहुंचने में सफल हुई हैं.
स्थानीय कोच निवास मंडल ने करमाटांड़ में सीमित संसाधनों के बीच बच्चों को क्रिकेट का प्रशिक्षण देने और उन्हें बेहतर मंच उपलब्ध कराने का प्रयास किया है. पूर्णिमा और लक्ष्मी की सफलता से वे भी उत्साहित हैं.
उन्होंने कहा कि करमाटांड़ और आसपास के ग्रामीण इलाकों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है. जरूरत सिर्फ प्रतिभाओं को पहचानने, उन्हें सही प्रशिक्षण देने और आगे बढ़ने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की है. दोनों बेटियों का चयन इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण क्षेत्र में भी प्रतिभाएं बड़े स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं.
पूर्णिमा और लक्ष्मी की उपलब्धि केवल उनके परिवार की खुशी तक सीमित नहीं है. उनकी सफलता ने करमाटांड़ और आसपास की उन बेटियों के लिए भी उम्मीद की एक नई राह खोली है, जो खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती हैं.
आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद दोनों खिलाड़ियों ने जिस तरह अपने लक्ष्य को हासिल किया, वह बताता है कि प्रतिभा को यदि अवसर और सही मार्गदर्शन मिल जाए तो गांव की बेटियां भी राज्य और राष्ट्रीय स्तर के मंच तक पहुंच सकती हैं. अब जरूरत है कि ऐसी प्रतिभाओं को नियमित प्रशिक्षण, बेहतर मैदान, खेल सामग्री और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के पर्याप्त अवसर मिलें, ताकि करमाटांड़ की पहचान साइबर अपराध के मामलों से आगे बढ़कर खेल प्रतिभाओं की धरती के रूप में भी बने.
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