Jamui : बिहार से स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है. अक्सर दुर्घटना में घायल व बीमारी से पीड़ितों को बेहतर इलाज के लिए अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस का सहारा लिया जाता है. मगर बिहार के जमुई में कुछ ऐसा हुआ कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए है.
जानकारी के अनुसार झाझा प्रखंड के बाबू बांक गांव निवासी 75 वर्षीय धीरज रविदास की दो दिन पहले अचानक तबियत खराब हो गई. झाझा में प्राथमिक उपचार के बाद परिजन उन्हें जमुई सदर अस्पताल ले गए, जहां सीटी स्कैन में सिर में ब्लड जमने की पुष्टि हुई. चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर कर दिया.
दोपहर 1:11 बजे एंबुलेंस पटना के लिए निकल गई. रास्ते में सिकंदरा में चालक ने 100 रुपये का डीजल भरवाया, लेकिन मतासी के पास पहुंचते ही लगभग 1:40 बजे एंबुलेंस का तेल खत्म हो गया और गाड़ी बीच सड़क बंद हो गई. अजीत ने जब चालक से पूछा तो वह तेल लाने की बात बोलकर चला गया. गाड़ी बीच रास्ते बंद थी. चालक काफी देर तक नहीं आया.
इसी दौरान कड़ी धूप और गर्मी के बीच मरीज की हालत बिगड़ने लगी और 3.30 बजे धीरज रविदास ने एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया. अजीत ने बताया कि पिताजी एंबुलेंस में तड़पते रहे पर कोई मदद नहीं मिली. यह घटना सिकंदरा-शेखपुरा मुख्य मार्ग पर मतासी के पास हुई.
मृतक के पुत्र अजीत रविदास ने एंबुलेंस सेवा देने वाली जेन प्लस कंपनी और चालक पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है. उन्होंने इस मामले की शिकायत सिविल सर्जन, एसपी और डीएम से करने के साथ-साथ एफआईआर दर्ज कराने की बात कही है.
इधर, एंबुलेंस सर्विस कंपनी का कहना है कि चालक के पास भारत पेट्रोलियम का कार्ड था, लेकिन संबंधित पंप पर तेल उपलब्ध नहीं होने के कारण ईंधन नहीं मिल सका. उन्होंने कहा कि कार्ड आधारित व्यवस्था में उसी कंपनी के पंप से तेल लेना होता है.
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