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जैप-1 ने मनाया 143 वां स्थापना दिवस, जवान पूरी जिम्मेवारी से निभाते हैं ड्यूटी

Ranchi : झारखंड सशस्त्र पुलिस ( जैप)-1 ने अपना 143 वां स्थापना दिवस मनाया. डोरंडा स्थित जैप -1 ग्राउंड में गुरुवार को कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जैप गोरखा जवानों की वीरता और अदम्य साहस के लिए जाना जाता है. नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई हो या फिर राजनेता की सुरक्षा की बात हो यह बटालियन पूरी जिम्मेवारी के साथ अपनी ड्यूटी निभाता हैं. जैप स्थापना दिवस के अवसर पर परिसर में ही आनंद मेले का भी आयोजन किया गया है. मेले में 84 स्टॉल लगाये गये हैं. आनंद मेला में प्राइड ऑफ गोरखा स्टॉल लगाया गया है. इसमें गोरखा समाज की उपलब्धि, उनकी संस्कृति को दर्शाया गया है. इसे भी पढ़ें - हजारीबाग">https://lagatar.in/hazaribagh-sand-smugglers-made-a-fatal-attack-on-co-and-asi-snatched-the-rifle-and-threw-it-in-the-water/">हजारीबाग

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शहीद बेदी पर श्रद्धांजलि देकर हुआ कार्यक्रम की शुरुआत

डोरंडा स्थित जैप ग्राउंड में शहीद बेदी पर श्रद्धांजलि देकर स्थापना दिवस कार्यक्रम की शुरुआत की गई. समारोह के मुख्य अतिथि जैप एडीजी प्रशांत सिंह ने गोरखा बटालियन के गौरवशाली इतिहास को लेकर कई बातें कहीं. उन्होंने कहा कि जैप वन का इतिहास बहुत ही गौरवशाली है. बटालियन के वीर जवानों ने हमेशा अपनी शहादत देखकर जैप 1 का नाम बुलंद किया है. हमें इस बटालियन पर गर्व है. बटालियन के बुलंदी के लिए कई तरह के कार्य योजना तैयार किये गये हैं, जिनपर जल्द ही अमल किया जाएगा. प्रशांत सिंह ने कहा कि अनुशासन और जुनून देखना है तो गोरखा वाहिनी को देखने की जरूरत है.

मुख्य अथिति ने भव्य परेड का निरीक्षण करते हुए सलामी ली

मुख्य अथिति एडीजी प्रशांत सिंह सहित अन्य ने भव्य परेड का निरीक्षण करते हुए सलामी ली. इस दौरान जैप वन ग्राउंड पर जवानों और बैंड पार्टी ने आकर्षक परेड पेश किया. बैड डिस्पले ने सभी को मंत्रमुग्ध कर लिया था. जनवरी 1880 में अंग्रेजों के शासनकाल में इस वाहिनी की स्थापना न्यू रिजर्व फोर्स के नाम से हुई थी. वर्ष 1892 में इस वाहिनी को बंगाल मिलिट्री पुलिस का नाम दिया गया. इस वाहिनी की टुकडियों की प्रतिनियुक्ति तत्कालीन बंगाल प्रांत, बिहार, बंगाल और ओडिशा को मिलाकर की जाती थी. साल 1905 में इस वाहिनी का नाम बदलकर गोरखा मिलिट्री रखा गया. राज्य में प्रतिनियुक्त गोरखा सिपाहियों को इस वाहिनी में समायोजित किया गया. देश में स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1948 में इस वाहिनी का नाम बदलकर प्रथम वाहिनी बिहार सैनिक पुलिस रखा गया था. साल 2000 में झारखंड अलग गठन के बाद इस वाहिनी का नाम झारखंड सशस्त्र पुलिस वन (जैप 1) रखा गया. इसे भी पढ़ें - अमेजन">https://lagatar.in/amazon-will-lay-off-18000-employees-the-process-will-start-from-january-18/">अमेजन

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