Ranchi : झारखंड में लंबे समय से लंबित बालू घाटों के संचालन को लेकर आखिरकार प्रक्रिया तेज हो गई है. खान विभाग की लगातार पहल और दबाव के बाद अब जिलों के उपायुक्त (DC) बोलीदाताओं के साथ इकरारनामा (Lease Deed) करने लगे हैं. शनिवार को रांची, बोकारो और जमशेदपुर जिले में कई बालू घाटों के लिए लीज डीड पर हस्ताक्षर किए गए.
प्राप्त जानकारी के अनुसार रांची जिले में श्यामनगर सैंड घाट एवं चोकेसेरेंग सैंड डिपॉजिट के लिए इकरारनामा किया गया. श्यामनगर बालू घाट का क्षेत्रफल 5 हेक्टेयर है, जिसकी वार्षिक पर्यावरण स्वीकृति (EC) क्षमता 25 लाख 42 हजार 658 सीएफटी निर्धारित है. वहीं, चोकेसेरेंग सैंड डिपॉजिट 3.50 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है, जिसकी वार्षिक EC क्षमता 13 लाख 80 हजार 545 सीएफटी है.
बोकारो जिले में पिचरी-2 सैंड घाट और खेतको-चालकारी बालू घाट के लिए लीज डीड साइन हुआ. पिचरी-2 घाट का क्षेत्रफल 4.72 हेक्टेयर है, जिसकी वार्षिक EC क्षमता 14 लाख 82 हजार 52 सीएफटी बताई गई है. खेतको-चालकारी घाट 26.14 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है.
इधर, जमशेदपुर में कोरेयामोहनपाल एवं स्वर्णरेखा नदी क्षेत्र से जुड़े दो बालू घाटों के लिए इकरारनामा हुआ. इनमें एक घाट 34.70 हेक्टेयर और दूसरा 46.30 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थित है.
खनन विभाग के अधिकारियों के अनुसार सामान्यतः एक हेक्टेयर बालू घाट से 4 से 5 लाख सीएफटी तक बालू का उठाव संभव होता है, जिसे SEIAA की गाइडलाइन के अनुसार 7 से 8 महीने के भीतर निकाला जाता है.
विभागीय सूत्रों का कहना है कि लीज डीड प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल्द ही इन घाटों से वैध रूप से बालू उठाव शुरू होने की उम्मीद है. इससे राज्य में बालू संकट कम होगा और अवैध खनन पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी.
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