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झारखंड विस बजट सत्र: सदन में उठी कर्नाटक, केरल व तमिलनाडू के राज्यपालों को बर्खास्त करने की मांग

Ranchi: झारखंड सरकार ने मंईयां सम्मान योजना लाकर 51 लाख महिलाओं को सशक्त बनाने का काम किया. कांग्रेस की नरसिंह राव की सरकार ने पेसा कानून लाया था. भाजपा की सरकारों ने झारखंड में पेसा नियमावली बनाने की कोशिश भी नहीं की. हमारी सरकार ने विस्थापन आयोग का गठन किया है. सरकार ने कानून व्यवस्था पर भी संकल्प दिखाया है.


अभिभाषण के खंड दो और तीन में गुरूजी को जोहार किया गया है. पूरी दुनिया ने जोहार किया उन्हें. उनके प्यार व संघर्ष से ही झारखंड बना. क्या ये जोहार झूठ है. 


कर्नाटक, तमिलनाडू व केरल में राज्यपालों ने कैबिनेट के भाषण को नहीं पढ़ा. क्या यह संविधान का उल्लंघन नहीं है. राज्यपालों ने अपना अभिभाषण पढ़ दिया. उनके समानांतर मुख्यमंत्री को खड़ा होकर अभिभाषण पढ़ना पड़ा. क्या हमारा संविधान राज्यपालों को इसकी इजाजत देता है. पीएम और गृह मंत्री मौन बैठे हैं. ऐसे राज्यपालों को बर्खास्त किया जाना चाहिए. 

 

प्रदीप यादव ने भाजपा पर नफरत फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र की सरकार देश की सुरक्षा भूल गयी है. लोग बेरोजगारी, महंगाई को भूल गई है. चिंगारी भड़के तो सावन आग बुझाये, लेकिन सावन ही आग लगाये तो कौन बुझाये. भाजपा को समझने के लिए हिमंता विश्वा सरमा का बयान याद करिये. वो कहते हैं मियां को इतना परेशान करे कि वह असम छोड़ दे. कोई संवैधानिक पद पर बैठ कर इस तरह की बात कर सकता है क्या? एक वीडियो ट्विट किया जाता है जिसमें हिमंता मुस्लिमों को गोली मार रहे होते हैं.

 
भाजपा विधायक नीरा यादव ने कहा कि झारखंड पर बात हो. राज्यपाल के अभिभाषण पर बात हो.


प्रदीप यादव ने आगे कहा कि क्या कोई व्यक्ति संवैधानिक पद पर बैठ कर इस तरह का काम कर सकता है. नहीं. ये लोग नफरत की बीज बोने के लिए इस तरह का काम करते हैं. ये लोग वंदे मातरम की क्या बात करेंगे. आजादी की लड़ाई नहीं लड़ने वालों ने आजादी के बाद तिरंगा नहीं लहराया था. बंगाल की चुनाव के कारण ये वंदे मातरम बोल रहे हैं. ये वंदे मातरम का सम्मान नहीं करते.


जो अमेरिका और ट्रंप के इशारे पर देश के किसानों को बर्बाद कर रहा है. ये लोग पंडित नेहरू की बात करेंगे. दुनियाभर के नामचीन लोग पंडित नेहरू से बात करते थे. उस समय ई-मेल होता तो आइंस्टीन का मेल आता और आपके नेता को एप्स्टीन का ई-मेल आता है.


खंड दो में विपरित परिस्थिति का जिक्र है. हम उसी की चर्चा कर रहे हैं. वो क्या है. केंद्र ने नहीं दिये पैसे, छात्रों की छात्रवृत्ति नहीं मिली. हमें मिलना था 17 हजार करोड़ से अधिक. दिया सिर्फ 7000 करोड़. केंद्र ने हमारे पैसे को रोक लिया. मनरेगा जैसी योजना को बदल कर राम के नाम को ढ़ाल के रुप में उपयोग कर रहे हैं. ये लोग देश में सिर्फ नफरत फैलाते हैं.


राज्य के नौजवानों, अल्पसंख्यकों, आदिवासी-दलित पिछड़ों का सरकार पर भरोसा है. बहाली की प्रक्रिया तेज होनी चाहिए. जेपीएससी परीक्षा में उम्र की छूट दे सरकार. जेटेट की परीक्षा हो.

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