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झारखंड विस बजट सत्र : बालू घाटों की कैटेगरी का मुद्दा उठा, मंत्री ने वन और टू की जानकारी दी

झारखंड विधानसभा बजट सत्र के पांचवें दिन कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोनगाड़ी ने बालू घाटों की कैटेगरी को लेकर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि भाजपा शासन में घाटों को कैटेगरी में बांटा गया था.
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  • बालू घाटों की नीलामी में आदिवासियों को टेंडर मिले

Ranchi : झारखंड विधानसभा बजट सत्र के पांचवें दिन कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोनगाड़ी ने बालू घाटों की कैटेगरी को लेकर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि भाजपा शासन में घाटों को कैटेगरी में बांटा गया था. 

 

विधायक ने कहा कि पेशा नियमावली में ग्रामसभा की सहमति के बिना कोई टेंडर प्रक्रिया नहीं हो सकती है. यह जानना चाहा कि क्या सरकार बालू घाटों की कैटेगरी-वन और कैटेगरी-टू को खत्म करके पहले की तरह बिना कैटेगरी के नियम लागू करना चाहती है. 

 

इस पर मंत्री ने जवाब देते हुए बताया कि पहले बालू घाट बिना कैटेगरी के लघु खनिज के तहत आते थे. लेकिन अब उन्हें कैटेगरी के साथ लाया गया है. नई नियमावली के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा की अनुमति के बिना कोई भी खनिज पट्टा जारी नहीं किया जा सकता. झारखंड सैंड माइनिंग मिनरल रूल के अनुसार नीलामी जिला स्तर पर की जाती है. 

 


इस पर विधायक कोनगाड़ी ने कहा कि वह सिर्फ यह जानना चाहते हैं कि सरकार कैटेगरी को खत्म करना चाहती है या नहीं? नमन विक्सल कोनगाड़ी ने सदन में कैटेगरी-टू के टेंडर शर्तों में अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समितियों के खनन अधिकारों का हनन होने का मुद्दा उठाया. 

 

इस पर मंत्री ने बताया कि किसी भी बालू घाट की नीलामी टेंडर से होती है और ग्रामसभा की अनुमति के बिना कोई लीज जारी नहीं की जा सकती. उन्होंने बताया कि कैटेगरी-वन में बालू खनन का अधिकार सीधे ग्राम समिति को दिया जा रहा है. 

 

 

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