Ranchi : झारखंड विधानसभा बजट सत्र के चौथे दिन बजट पर चर्चा के दौरान विधायक जयराम महतो ने सरकार की वित्तीय कार्यप्रणाली और विभागों द्वारा बजट राशि खर्च न कर पाने के मुद्दे पर गंभीर सवाल उठाए.
उन्होंने कहा कि एक ही वित्तीय वर्ष में तीन-तीन अनुपूरक बजट लाए जा रहे हैं. जबकि कई विभाग अपने मूल बजट का समुचित उपयोग नहीं कर पा रहे हैं.
विधायक ने बताया कि ग्रामीण कार्य विभाग आवंटित बजट का लगभग आधी राशि भी खर्च नहीं कर पाया है. इसके बावजूद उसे इस बार फिर लगभग 107 करोड़ रुपये का प्रावधान दिया गया है.
जयराम महतो ने कहा कि डुमरी में एक संकीर्ण पुलिया के निर्माण के लिए एक वर्ष पहले अनुशंसा भेजी गई थी. लेकिन आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है. उन्होंने कहा कि वहां लगातार हादसे हो रहे हैं, जो प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है.
उनका कहना था कि जब विभाग पहले से मिली राशि का सही उपयोग नहीं कर पाते, तो वित्तीय वर्ष के अंतिम महीने में नए आवंटन का प्रभावी इस्तेमाल होना मुश्किल है.
विधायक जयराम ने कहा कि सीडी रेशियो किसी भी राज्य की आर्थिक सेहत का थर्मामीटर होता है. सितंबर 2025 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि झारखंड का सीडी रेशियो मात्र 52.19 प्रतिशत है. जबकि राष्ट्रीय औसत लगभग 80 प्रतिशत के आसपास है.
इसका अर्थ है कि राज्य की करीब 48 प्रतिशत पूंजी बाहर जा रही है, जिससे स्थानीय उद्यमियों, किसानों और एमएसएमई क्षेत्र को पर्याप्त ऋण नहीं मिल पा रहा है.
2025-26 के अनुमानों के अनुसार, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में 88,300 करोड़ रुपये की ऋण क्षमता होने के बावजूद लक्ष्य हासिल नहीं हो पा रहा है, जिससे रोजगार सृजन प्रभावित हो रहा है और प्रति व्यक्ति आय व जीडीपी पर नकारात्मक असर पड़ रहा है. वित्त मंत्री से अपेक्षा जताई कि राज्य का सीडी रेशियो कम से कम 60 से 70 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए.
जयराम महतो ने प्रशासनिक मुद्दों पर भी सरकार को घेरा. कहा कि डुमरी अनुमंडल में नई सरकार के गठन के एक सप्ताह बाद से ही एसडीओ और बीडीओ के पद रिक्त हैं. इसके अलावा 13 प्रखंड स्तरीय पद भी खाली पड़े हैं. उन्होंने इन पदों को शीघ्र भरने की मांग की.
विधायक ने समाज कल्याण के तहत दिव्यांगों, विधवाओं और वृद्धजनों को मंईयां सम्मान योजना की तर्ज पर 2000 रुपये की नियमित पेंशन देने का प्रस्ताव भी रखा.
जयराम महतो ने सदन में 1984 के सिख दंगों का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि दिल्ली और कानपुर के बाद बोकारो के चास में भी व्यापक हिंसा हुई थी, जिसमें भारी लूटपाट और 72 से अधिक लोगों की जान गई थी.
41 वर्ष बीत जाने के बाद भी पीड़ितों को समुचित न्याय नहीं मिल पाया है. उन्होंने मांग की कि उच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित वन मैन कमीशन को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि पीड़ितों को शीघ्र मुआवजा, नौकरी और पेंशन सुनिश्चित की जा सके.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें


Leave a Comment