Search

उत्पाद नियमावली पर पुनर्विचार की मांग, झारखंड बार एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने सौंपा ज्ञापन

Ranchi : झारखंड बार एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल अध्यक्ष रंजन कुमार के नेतृत्व में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के संयुक्त सचिव से मिला और प्रस्तावित उत्पाद होटल, रेस्टोरेंट, बार एवं क्लब अनुज्ञापन एवं संचालन नियमावली 2026 से संबंधित मांगों और आपत्तियों को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा.

 

ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य में संचालित लाइसेंसधारी बार, होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय लंबे समय से विभागीय नियमों का पालन करते हुए काम कर रहे हैं और राज्य सरकार को नियमित रूप से राजस्व भी उपलब्ध करा रहे हैं.

 

ऐसे में प्रस्तावित नियमावली 2026 के कुछ प्रावधान व्यावहारिक परिस्थितियों से मेल नहीं खाते और इससे व्यवसाय संचालन में गंभीर कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं.

 

एसोसिएशन ने लाइसेंस शुल्क संरचना पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि पूर्व व्यवस्था में नगर निगम, नगर परिषद, कैंटोनमेंट और पंचायत क्षेत्रों के लिए अलग-अलग लाइसेंस दरें निर्धारित थीं, जो स्थानीय आर्थिक स्थिति, ग्राहक क्षमता और व्यावसायिक वास्तविकताओं के अनुरूप थीं.

 

प्रस्तावित नियमावली में सभी क्षेत्रों के लिए एक समान और उच्च लाइसेंस शुल्क तय करने का सुझाव छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए आर्थिक रूप से बोझिल साबित होगा.

 

सीमित ग्राहक आधार और कम क्रय शक्ति वाले क्षेत्रों में समान शुल्क से कई इकाइयों का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है. इसलिए लाइसेंस शुल्क का निर्धारण क्षेत्र आधारित, यथार्थपरक और पारदर्शी तरीके से किए जाने की मांग की गई है.

 

न्यूनतम गारंटी राजस्व यानी MGR के प्रावधान पर भी एसोसिएशन ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है. ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि बार और होटल व्यवसाय स्थानीय मांग, पर्यटन गतिविधियों, सामाजिक आयोजनों और मौसमी प्रभावों पर निर्भर रहते हैं, जिससे आय में लगातार उतार चढ़ाव बना रहता है.

 

पूर्व में कठोर MGR व्यवस्था के बिना भी सरकार को नियमित राजस्व मिलता रहा है. ऐसे में अनिवार्य MGR लागू करने से छोटे संचालकों पर अनावश्यक वित्तीय दबाव पड़ेगा और व्यवसाय संचालन प्रभावित होगा.

 

एसोसिएशन ने MGR को समाप्त करने या फिर इसे लचीला बनाते हुए वास्तविक व्यावसायिक आंकड़ों और ऐतिहासिक बिक्री के आधार पर लक्ष्य निर्धारण करने का सुझाव दिया है.

 

कार्टन आधारित भंडारण व्यवस्था को लेकर भी ज्ञापन में व्यावहारिक समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया गया है. एसोसिएशन के अनुसार प्रत्येक कार्टन को लंबे समय तक सुरक्षित रखना, उनका रिकॉर्ड बनाए रखना और भंडारण करना अधिकांश व्यावसायिक परिसरों में संभव नहीं है, क्योंकि भंडारण के लिए सीमित स्थान उपलब्ध होता है.

 

लगातार नए स्टॉक आने से पुराने कार्टन संभालकर रखना सुरक्षा, स्वच्छता और संचालन की दृष्टि से भी कठिनाई पैदा करता है. इससे अव्यवस्था बढ़ने और सुचारू संचालन बाधित होने की आशंका है.

 

एसोसिएशन ने कार्टन आधारित अनुपालन को संशोधित कर बारकोड या बिलिंग आधारित इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग को मान्य करने अथवा सीमित अवधि के लिए ई रिकॉर्ड, फोटो या सीरियल नंबर और आईडी आधारित वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने की मांग की है.

 

ज्ञापन में VAT को पुनः शामिल किए जाने के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई गई है. एसोसिएशन ने कहा है कि VAT लागू होने से व्यवसायों पर अतिरिक्त अनुपालन बोझ बढ़ेगा और व्यवहारिक रूप से Double Taxation जैसी स्थिति उत्पन्न होगी. इसका सीधा असर उपभोक्ताओं, पर्यटन और राज्य के व्यावसायिक वातावरण पर पड़ेगा. इसलिए VAT को प्रस्तावित नियमावली से हटाने की मांग की गई है.

 

प्रतिनिधिमंडल ने आग्रह किया कि प्रस्तावित नियमावली के प्रारंभिक प्रावधानों, विशेष रूप से लाइसेंस शुल्क, MGR, कार्टन भंडारण और VAT से संबंधित बिंदुओं पर सहानुभूतिपूर्वक पुनर्विचार किया जाए. 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp