Ranchi News : MMDR विधेयक-2026 को लेकर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता की. उन्होंने विधेयक को झारखंड जैसे खनिज संपदा वाले राज्यों के लिए अहम बताते हुए कहा कि इससे राज्यों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और विकास कार्यों को गति मिलेगी. उन्होंने कहा कि विधेयक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है.
संजय सेठ ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विधेयक में राज्यों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है. उनके मुताबिक खनिज राजस्व का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा पहले की तरह राज्यों को मिलता रहेगा. उन्होंने दावा किया कि राजस्व में बढ़ोतरी का सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और रोजगार के अवसरों पर पड़ेगा.
उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस अब खनिजों के अवैध उत्खनन और चोरी को रोकने पर भी है. सेठ ने कहा कि जितना अधिक वैध खनन होगा और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण होगा, उतना ही ज्यादा राजस्व सरकार को मिलेगा. इससे विकास योजनाओं के लिए संसाधन भी बढ़ेंगे.
रक्षा राज्य मंत्री ने खनिज राजस्व के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि 2014 से पहले झारखंड को खनिज क्षेत्र से करीब 4,662 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता था. वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 33,494 करोड़ रुपये हो गया. उन्होंने इसे करीब 618 प्रतिशत की वृद्धि बताया.
संजय सेठ ने कहा कि आने वाले समय में सरकार का उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसी कर व्यवस्था तैयार करना है जो पारदर्शी और निवेश के अनुकूल हो. इससे खनन क्षेत्र में निवेश और उत्पादन बढ़ने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है.
उन्होंने कहा कि भारत के पास पर्याप्त कोयला संसाधन होने के बावजूद देश को कोयले का आयात करना पड़ता है. उनके अनुसार खनन प्रक्रियाओं को आसान बनाकर और अवैध खनन पर रोक लगाकर घरेलू उत्पादन बढ़ाया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि खनन गतिविधियों के विस्तार का फायदा केवल सरकारी खजाने को नहीं होगा. परिवहन, उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र के साथ स्थानीय कारोबार को भी इसका लाभ मिलेगा.
संजय सेठ ने झारखंड में खनन परियोजनाओं के संचालन में देरी का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने सिंहभूम के विजया-2 प्रोजेक्ट का उल्लेख करते हुए दावा किया कि नौ महीने तक लीज नहीं मिलने से राज्य को करीब 400 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ.
उन्होंने कहा कि झारखंड में खनिज संसाधनों की कमी नहीं है, लेकिन प्रक्रियात्मक देरी के कारण राज्य को राजस्व और रोजगार के अवसरों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने अवैध खनन के साथ प्रशासनिक स्तर पर होने वाली देरी को भी रोकने की जरूरत बताई.
रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई के बाद अब खनिज चोरी और अवैध खनन पर भी प्रभावी नियंत्रण की दिशा में आगे बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों का लाभ आम लोगों तक पहुंचना चाहिए.
संजय सेठ ने कहा कि MMDR विधेयक का उद्देश्य राज्यों का राजस्व बढ़ाने, रोजगार के अवसर पैदा करने, खनन क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करना है. उन्होंने विपक्ष से विधेयक का राजनीतिक विरोध करने के बजाय इसके प्रावधानों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

