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झारखंड बजट में कई कमियां: भाकपा माले

झारखंड बजट 2026-27 का भाकपा माले ने स्वागत किया. पार्टी ने कहा है कि वित्त मंत्री के बजट में गंभीर कमजोरियां हैं और यह राज्य की ठोस आर्थिक समस्याओं के प्रति ठंडा रुख अपनाता दिखता है.
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Ranchi : झारखंड बजट 2026-27 का भाकपा माले ने स्वागत किया. पार्टी ने कहा है कि वित्त मंत्री के बजट में गंभीर कमजोरियां हैं और यह राज्य की ठोस आर्थिक समस्याओं के प्रति ठंडा रुख अपनाता दिखता है.

 

पार्टी ने कहा कि बजट के आकार में 9 प्रतिशत की वृद्धि अपने-आप में विकास की दिशा तय नहीं करती. भाकपा माले के अनुसार, राज्य जिन बुनियादी आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है, उनके समाधान की दिशा में बजट में ठोस पहल का अभाव है.

 

माले ने विशेष रूप से ‘मंईयां सम्मान योजना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें किसी ठोस वृद्धि का जिक्र नहीं है. इससे लाभुक महिलाओं की संख्या में कटौती हो सकती है और नई महिलाओं को योजना में शामिल करने में दिक्कतें बढ़ेंगी.

 

रोजगार के मुद्दे को भी पार्टी ने प्रमुख सवाल बताया. बयान में कहा गया कि बजट रोजगार सृजन की दिशा में किसी ठोस कदम का संकेत नहीं देता. हालांकि, भाकपा माले ने यह सकारात्मक माना कि वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा राशि में कटौती का मुद्दा उठाया है.

 

पार्टी ने कहा कि मनरेगा को समाप्त कर ‘विबीग्रामजी’ योजना लागू करने से राज्य पर 5640 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ने की बात सामने आई है. साथ ही जीएसटी और अन्य करों में केंद्र सरकार की नीतियों के कारण राज्य को नुकसान होने तथा टैक्स और अनुदान मिलाकर 16,000 करोड़ रुपये की कमी की सच्चाई उजागर की गई है.

 

राज्य सरकार ने झारखंड के अधिकारों के लिए केंद्र से डेढ़ लाख करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग करने की बजाय ‘छोटे भाई’ की भूमिका पर जोर देते हुए अफसोस जताया.

 

भाकपा माले ने कहा कि यदि वित्त मंत्री लाखों सहियाओं, रसोइयों और सेविकाओं के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि का संकेत नहीं देते हैं, तो ‘जेंडर जस्टिस’ महज नारेबाजी बनकर रह जाएगा.

 

पार्टी ने उम्मीद जताई कि बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हस्तक्षेप करेंगे और ‘अबुआ बजट’ को झारखंड की समस्याओं के समाधान की दिशा में आगे बढ़ाएंगे. साथ ही राज्य सरकार से सरकारी उद्योगों और जन परिवहन को पुनर्जीवित करने के लिए ठोस योजना प्रस्तुत करने की मांग की गई.

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