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झारखंड में उमंग दिवस की शुरुआत, किशोरों को मिलेगा स्वास्थ्य और परामर्श का मंच

राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम और स्कूल स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम के तहत यूनिसेफ के सहयोग से उमंग दिवस का राज्य स्तरीय शुभारंभ शुक्रवार को आयुष्मान आरोग्य मंदिर, जमचूआ, नामकुम से किया गया.
 

Ranchi : राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम और स्कूल स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम के तहत यूनिसेफ के सहयोग से उमंग दिवस का राज्य स्तरीय शुभारंभ शुक्रवार को आयुष्मान आरोग्य मंदिर, जमचूआ, नामकुम से किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने की.

 

इस अवसर पर डॉ मुकेश मिश्रा, डॉ लाल मांझी, डॉ पुष्पा, डॉ कमलेश, डॉ विजय किशोर रजक, डॉ प्रभात कुमार, यूनिसेफ झारखंड की चीफ फील्ड ऑफिसर कनिनिका मित्रा, राज्य समन्वयक रफत फरजाना, हेल्थ ऑफिसर वनेश माथुर, एसबीसी स्पेशलिस्ट जोशीला पल्लापति सहित कई अधिकारी मौजूद रहे.

 

उमंग दिवस किशोरों के लिए एक मासिक मंच है, जहां 10 से 19 वर्ष आयु वर्ग के किशोर-किशोरियों को स्वास्थ्य से जुड़ी सही जानकारी, परामर्श और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा. कार्यक्रम की शुरुआत अभियान निदेशक और उपस्थित किशोर-किशोरियों द्वारा रंग-बिरंगे गुब्बारे उड़ाकर की गई.

 

कार्यक्रम के दौरान शशि प्रकाश झा ने किशोरों, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, एएनएम, साहिया और समुदाय के लोगों से बातचीत की. उन्होंने कहा कि किशोरावस्था ऐसा समय होता है जब बच्चों में जिज्ञासा सबसे अधिक होती है और वे कई सवाल पूछते हैं. जो बच्चे अपनी जिज्ञासाओं के साथ आगे बढ़ते हैं, वही आगे चलकर जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनते हैं.

 

उन्होंने कहा कि किशोरियों की शादी 18 वर्ष और किशोरों की शादी 21 वर्ष की आयु के बाद ही होनी चाहिए. साथ ही उन्होंने शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि लड़कियों को भी पढ़ाई और रोजगार के अवसर मिलने चाहिए, ताकि वे सशक्त बन सकें.

 

यूनिसेफ की कनिनिका मित्रा ने कहा कि उमंग दिवस बच्चों को अपनी बात खुलकर रखने का सुरक्षित मंच देगा. उन्होंने कहा कि किशोरों के साथ संवेदनशीलता और समझदारी से व्यवहार करना जरूरी है.

 

कार्यक्रम में किशोरों को किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक बदलाव, स्वस्थ जीवनशैली, पोषण, आयरन फोलिक एसिड के महत्व और गैर संचारी रोगों के बारे में जानकारी दी गई. साथ ही बाल विवाह के दुष्प्रभावों पर क्विज प्रतियोगिता के माध्यम से जागरूक किया गया.

 

उमंग दिवस अब हर महीने के पहले शुक्रवार को राज्य के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, स्वास्थ्य केंद्रों और स्कूल स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम से जुड़े विद्यालयों में आयोजित किया जाएगा. यहां किशोर-किशोरियां स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर चर्चा कर सकेंगे.

 

 


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