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Jharkhand : SIR में लाखों आदिवासियों के परेशान होने का दावा, जनाधिकार महासभा ने चुनाव आयोग से मांगी स्पष्टता

Ranchi : झारखंड जनाधिकार महासभा ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के बयान पर सवाल उठाए हैं. महासभा ने कहा कि आयोग तार्किक विसंगति Logical Discrepancy के मुद्दे पर सही स्थिति नहीं बता रहा है और इससे लोगों में भ्रम पैदा हो रहा है.
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Ranchi : झारखंड जनाधिकार महासभा ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के बयान पर सवाल उठाए हैं. महासभा ने कहा कि आयोग तार्किक विसंगति Logical Discrepancy के मुद्दे पर सही स्थिति नहीं बता रहा है और इससे लोगों में भ्रम पैदा हो रहा है.


महासभा ने कहा कि उसने 17 जुलाई को यह मुद्दा उठाया था कि आदिवासी इलाकों के कई मतदान केंद्रों पर करीब 30 प्रतिशत मतदाताओं के नाम तार्किक विसंगति की सूची में दिख रहे हैं. इसके अलावा कई मतदाताओं के पूर्वजों का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नहीं है. ऐसे में बड़ी संख्या में आदिवासी मतदाताओं को नोटिस मिलने और उनका नाम मतदाता सूची से हटने का खतरा है.

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महासभा का कहना है कि वह विभिन्न संगठनों के साथ मिलकर पूरे राज्य में SIR प्रक्रिया के दौरान लोगों की मदद कर रही है. संगठन ने दावा किया कि उसने जमीनी स्तर पर जांच के बाद यह मुद्दा उठाया है और 15 जुलाई को चुनाव आयोग को पत्र लिखकर भी इसकी जानकारी दी थी.


महासभा ने कहा कि BLO के मोबाइल ऐप में View Logical Discrepancy का विकल्प मौजूद है. इस विकल्प पर क्लिक करने से संबंधित बूथ के उन मतदाताओं की सूची दिखाई देती है, जिनके रिकॉर्ड में विसंगति बताई गई है. संगठन का दावा है कि उसने कई बूथों का निरीक्षण किया, जहां 25 से 45 प्रतिशत मतदाताओं के नाम इस सूची में मिले.


महासभा ने यह भी कहा कि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने अपने बयान में माना है कि जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में तार्किक विसंगति होगी, उन्हें ERO या AERO की ओर से नोटिस जारी किया जाएगा और दस्तावेजों के आधार पर सुधार कराया जाएगा. संगठन का कहना है कि यही उसकी चिंता है, क्योंकि इससे बड़ी संख्या में लोगों को परेशानी होगी.


महासभा के अनुसार, वर्ष 2003 और वर्तमान मतदाता सूची में नाम, उम्र और रिश्तों से जुड़ी कई गलतियां हैं. ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में अलग-अलग सरकारी दस्तावेजों में नाम की स्पेलिंग और उम्र में अंतर आम बात है. ऐसे में इन त्रुटियों का खामियाजा मतदाताओं को नहीं भुगतना चाहिए.


महासभा ने पश्चिम बंगाल के SIR का भी उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां बड़ी संख्या में मतदाताओं को तार्किक विसंगति के आधार पर नोटिस मिला था और लाखों नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे. संगठन ने कहा कि इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने भी चुनाव आयोग को विसंगति की सूची सार्वजनिक करने और मामलों के निपटारे के लिए विशेष व्यवस्था करने का निर्देश दिया था.


महासभा ने मांग की है कि झारखंड में तार्किक विसंगति की प्रक्रिया को समाप्त किया जाए. साथ ही 5 अगस्त को जारी होने वाली प्रारूप मतदाता सूची के साथ तार्किक विसंगति की सूची भी सार्वजनिक की जाए. संगठन ने यह भी मांग की कि चुनाव आयोग स्पष्ट करे कि विसंगति वाले मतदाताओं के लिए सुधार की प्रक्रिया क्या होगी और इससे संबंधित सभी आदेश और अधिसूचनाएं सार्वजनिक की जाएं.

 

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