Ranchi : झारखंड के आपराधिक गिरोहों में एक नया और अजीबोगरीब ट्रेंड देखने को मिल रहा है. अपराधी अब किसी घटना को अंजाम देने के तुरंत बाद उसकी ज़िम्मेदारी सोशल मीडिया पर बयान जारी कर ले रहे हैं. सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेकर अपराधी लोगों के बीच दहशत और आतंक फैला रहे है. वहीं, अनजाने में अपराधी पुलिस की जांच को आसान बना रहे है. वारदात के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर ज़िम्मेदारी लेने से पुलिस को शामिल अपराधियों और गिरोहों तक पहुंचने में तेज़ी से सफलता मिल रही है, जिसके कारण कई अपराधी गिरफ्तार भी हो चुके हैं.
वारदात के बाद सोशल मीडिया पर 'कबूलनामा
- चतरा गोलीबारी (9 जनवरी): राजधर साइडिंग के पास हुई गोलीबारी की ज़िम्मेदारी राहुल सिंह गिरोह ने ली.
- रामगढ़, कुजू गोलीबारी (6 जनवरी): कोयला व्यवसायी डब्बू सिंह के आवास पर हुई गोलीबारी की ज़िम्मेदारी राहुल दुबे गैंग ने पर्चा छोड़कर ली.
- रामगढ़ ओवर ब्रिज निर्माण कार्य गोलीबारी (3 जनवरी): ओवर ब्रिज निर्माण कार्य के ऑफिस में हुई गोलीबारी का जिम्मा भी राहुल सिंह गिरोह ने ली.
- हजारीबाग, उरीमारी गोलीबारी (30 दिसंबर, 2025): फायरिंग की ज़िम्मेदारी राहुल दुबे गैंग ने ली.
- सयाल उरीमारी गोलीकांड (24 दिसंबर, 2025): वारदात की ज़िम्मेदारी भी राहुल दुबे गैंग ने ली.
सोशल मीडिया बना दहशत फैलाने का अड्डा
झारखंड में अपराधियों ने सोशल मीडिया के जरिए दहशत और आतंक फैलाने का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है. इसकी शुरुआत अमन साव (अब मृत) ने की थी, जो हथियारों के साथ तस्वीरें फेसबुक पर पोस्ट करता था और घटनाओं की ज़िम्मेदारी लेता था, जिससे उसने अपना आपराधिक साम्राज्य बनाया. अब, प्रिंस खान, राहुल दुबे, और राहुल सिंह जैसे अपराधी भी इसी रास्ते पर चल रहे हैं. ये गिरोह फेसबुक पर आत्याधुनिक हथियारों के साथ तस्वीरें पोस्ट करते हैं और घटनाओं की ज़िम्मेदारी लेकर न सिर्फ अपना दबदबा दिखाने की कोशिश करते हैं, बल्कि राज्य भर में दहशत फैलाने का काम कर रहे हैं.
पुलिस के लिए दोधारी तलवार
सोशल मीडिया पर अपराधियों का वारदात के बाद कबूलनामा पुलिस के लिए दोहरी स्थिति पैदा कर रहा है. एक ओर, तुरंत ज़िम्मेदारी लेने से जांच की दिशा निश्चित हो जाती है और अपराधियों तक पहुंचना आसान हो जाता है, जिससे अपराधियों की गिरफ्तारी में तेज़ी आ रही है. वहीं दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर सरेआम हथियारों का प्रदर्शन और अपराध का दावा करना राज्य में कानून-व्यवस्था और आम लोगों के बीच सुरक्षा की भावना के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, जिस पर पुलिस और प्रशासन को लगाम लगाने की ज़रूरत है.
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