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झारखंड सरकार ने HC को बताया, चार सप्ताह में सूचना आयोग कार्यरत हो जाएगा

राज्य सूचना आयोग को पिछले पांच वर्षों से गैर-कार्यशील बनाए जाने से संबंधित मामले की सुनवाई गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में हुई. कोर्ट के आदेश के आलोक में राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार और कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के सचिव कोर्ट में अदालत में हाजिर हुए.
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  • मुख्य सचिव और कार्मिक सचिव कोर्ट में हाजिर

Ranchi :   राज्य सूचना आयोग को पिछले पांच वर्षों से गैर-कार्यशील बनाए जाने से संबंधित मामले की सुनवाई गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में हुई. कोर्ट के आदेश के आलोक में राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार और कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के सचिव कोर्ट में अदालत में हाजिर हुए.

 

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद एवं न्यायमूर्ति एके राय की खंडपीठ ने राज्य सरकार से जानना चाहा कि झारखंड में सूचना आयोग कब तक कार्यशील कर दिया जाएगा.

 

इस पर महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कोर्ट को बताया कि चार सप्ताह में राज्य सूचना आयोग कार्यरत हो जाएगा. राज्य  सरकार के आग्रह को देखते हुए कोर्ट ने चार सप्ताह का समय सरकार को दिया. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता विकास कुमार ने पक्ष रखा.

 

जिम्मेदार अधिकारियों पर अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी

बता दें कि पिछली सुनवाई में कोर्ट ने साफ किया था कि यदि आयोग को शीघ्र कार्यशील नहीं बनाया गया तो राज्य के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है. कोर्ट ने एक अपील (LPA)  की सुनवाई करते हुए यह कहा था.

 

इस मामले में कोर्ट ने आज मुख्य सचिव एवं कार्मिक सचिव को तलब किया था. खंडपीठ ने कहा था कि राज्य सूचना आयोग वर्ष 2020 से निष्क्रिय है, जिसके कारण आरटीआई कानून के तहत द्वितीय अपील का मंच उपलब्ध नहीं है.

 

इससे हाईकोर्ट पर अनावश्यक रूप से याचिकाओं का बोझ बढ़ रहा है. कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया था कि पहले ही 12 दिसंबर 2025 को राज्य को आयोग को कार्यशील बनाने का निर्देश दिया जा चुका है.  इसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है. 


जानें क्या है मामला 

दरअसल अपीलकर्ता बिरेंद्र सिंह ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत जानकारी मांगी थी. निर्धारित 30 दिनों की अवधि में सूचना नहीं मिलने पर उन्होंने प्रथम अपील दायर की, इसके बाद भी उन्हें जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई.

 

सामान्यतः ऐसी स्थिति में दूसरी अपील राज्य सूचना आयोग के समक्ष दायर की जाती है. लेकिन आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति न होने के कारण आयोग लंबे समय से निष्क्रिय है. इस कारण अपीलकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

 

हालांकि एकल न्यायाधीश ने याचिका खारिज करते हुए आरटीआई अधिनियम के अंतर्गत वैकल्पिक उपाय अपनाने की छूट दी थी, जिसके खिलाफ यह अपील दायर की गई. 

 

 

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