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रांची में झारखंड सरकार विकसित करेगी ‘लेबर अड्डा’, मिलेगी बुनियादी सुविधा

झारखंड सरकार रांची शहर में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक ‘लेबर अड्डा’विकसित करने की योजना पर काम शुरू किया जायेगा. श्रम,नियोजन,प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग ने इस दिशा में प्रारंभिक कार्रवाई शुरू कर दी है.
 

Ranchi: झारखंड सरकार रांची शहर में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक ‘लेबर अड्डा’विकसित करने की योजना पर काम शुरू किया जायेगा. श्रम,नियोजन,प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग ने इस दिशा में प्रारंभिक कार्रवाई शुरू कर दी है. विभागीय सूत्रों के अनुसार रांची शहर और आसपास के इलाकों से रोज़गार की तलाश में आने वाले मजदूरों को ध्यान में रखते हुए लेबर अड्डा विकसित किया जाएगा.

इन लेबर अड्डों में यदि किसी मजदूर को काम नहीं मिलता है या रात में घर लौटने के लिए वाहन की सुविधा नहीं होती है, तो वे यहां सुरक्षित रात गुजार सकेंगे. लेबर अड्डों में शौचालय,  पेयजल,  छाया और विश्राम की व्यवस्था होगी.

 

मजदूरों को मिलेगी बुनियादी सुविधा 

जानकारी के मुताबिक, राजधानी रांची के मोरहाबादी, लालपुर, हरमू रोड, बिरसा चौक, हटिया सहित कई इलाकों में सुबह-सुबह बड़ी संख्या में मजदूर काम की तलाश में पहुंचते हैं. इनमें महिला मजदूरों की संख्या भी अच्छी-खासी होती है. फिलहाल इन स्थानों पर शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में महिला कामगारों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. लेबर अड्डा विकसित होने से महिला मजदूरों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिलेगा.

 

पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य

सरकार का मानना है कि लेबर अड्डा मजदूरों को एक सुरक्षित और संगठित स्थान प्रदान करेगा, जहां उन्हें बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिल सकेगा. इसके लिए मजदूरों को ‘श्रम समाधान पोर्टल’ पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा. पंजीकरण के बाद मजदूर विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ सकेंगे.

 

स्वास्थ्य जांच और मुफ्त इलाज की सुविधा

पंजीकृत मजदूरों को राज्य सरकार की ‘श्रमिक स्वास्थ्य जांच योजना’ के तहत मुफ्त स्वास्थ्य जांच और इलाज की सुविधा भी दी जाएगी. इससे असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूती मिलेगी.

 

अन्य राज्यों के मॉडल से मिली प्रेरणा

विभागीय सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, तेलंगाना (हैदराबाद), महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में पारंपरिक लेबर अड्डों को विकसित कर आधुनिक रूप दिया गया है. कई जगहों पर मोबाइल एप के माध्यम से मजदूरों को काम उपलब्ध कराया जा रहा है और पारिश्रमिक का भुगतान भी पारदर्शी तरीके से किया जाता है. इन्हीं मॉडलों को ध्यान में रखते हुए झारखंड में भी लेबर अड्डा विकसित करने की योजना बनाई जा रही है.

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