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Jharkhand Graphene Hub: देश का 55% लाह उत्पादन सिर्फ झारखंड में

सस्टेनेबल जस्ट ट्रांजिशन टास्क फोर्स और Center for Environment and Energy Development (सीड) ने ‘ग्रीन गोल्ड: अनलॉकिंग ग्रेफीन इन कम्युनिटी-लेड एनर्जी ट्रांजिशन रिपोर्ट जारी की. रिपोर्ट में कहा है कि झारखंड में हर साल करीब 5500 टन ग्रेफीन उत्पादन की क्षमता है, जिससे राज्य दुनिया के बड़े उत्पादकों में शामिल हो सकता है.
 

Ranchi : सस्टेनेबल जस्ट ट्रांजिशन टास्क फोर्स और Center for Environment and Energy Development (सीड) ने ‘ग्रीन गोल्ड: अनलॉकिंग ग्रेफीन इन कम्युनिटी-लेड एनर्जी ट्रांजिशन रिपोर्ट जारी की. रिपोर्ट में कहा है कि झारखंड में हर साल करीब 5500 टन ग्रेफीन उत्पादन की क्षमता है, जिससे राज्य दुनिया के बड़े उत्पादकों में शामिल हो सकता है.

 

स्वच्छ ऊर्जा से हेल्थ टेक्नोलॉजी तक बढ़ रही मांग

रिपोर्ट के मुताबिक ग्रेफीन को ‘वंडर मटेरियल’ माना जाता है. इसका इस्तेमाल स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी स्टोरेज, हेल्थ टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग में तेजी से बढ़ रहा है. झारखंड में ग्रेफाइट, कोलबेड मीथेन और लाह जैसे ग्रेफीन के तीनों प्रमुख स्रोत उपलब्ध हैं. इससे राज्य को इस क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त मिल सकती है.

 

लाह से खुलेंगे ग्रामीण रोजगार के नए रास्ते

रिपोर्ट में कहा गया कि झारखंड देश का 55 प्रतिशत और दुनिया का 24 प्रतिशत लाह उत्पादन करता है. लाह से बनने वाला ग्रीन ग्रेफीन पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा. इससे जनजातीय समुदायों और महिलाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं.

 


सरकार दीर्घकालिक योजना पर कर रही काम

कार्यक्रम में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी पी ने कहा कि ग्रेफीन जैसे प्राकृतिक संसाधन राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ग्रामीण विकास, जलवायु अनुकूलन और औद्योगिक विकास को साथ लेकर योजना पर काम कर रही है.


निवेश और पीपीपी मॉडल पर जोर

टास्क फोर्स के अध्यक्ष ए.के. रस्तोगी ने कहा कि झारखंड में प्राकृतिक संसाधन, एमएसएमई नेटवर्क और रिसर्च संस्थानों की मजबूत मौजूदगी ग्रेफीन इकोनॉमी के लिए अनुकूल माहौल तैयार करती है. उन्होंने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप और निवेश आधारित रोडमैप तैयार करने पर जोर दिया.

 


सामुदायिक उद्यम और हरित रोजगार पर फोकस

प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने कहा कि लाह आधारित उद्योगों से सामुदायिक उद्यमशीलता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों ने राज्यव्यापी ग्रेफीन इकोसिस्टम, ग्रामीण वैल्यू चेन, मार्केट लिंकेज और हरित रोजगार के नए अवसर विकसित करने की जरूरत बताई. कार्यक्रम में उद्योग जगत, शोध संस्थानों, तकनीकी विशेषज्ञों, सरकारी विभागों और सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

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