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झारखंड में अवैध हथियारों की बड़ी मंडी, हर माह दर्ज हो रहे 50 मामले

झारखंड में अवैध हथियारों का जाल तेजी से फैल रहा है. राज्य पुलिस और खुफिया एजेंसियों के ताजा आंकड़ों के अनुसार, झारखंड के विभिन्न जिलों में अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री और बरामदगी से संबंधित औसतन 50 मामले हर महीने दर्ज किए जा रहे हैं.
 

Ranchi :  झारखंड में अवैध हथियारों का जाल तेजी से फैल रहा है. राज्य पुलिस और खुफिया एजेंसियों के ताजा आंकड़ों के अनुसार, झारखंड के विभिन्न जिलों में अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री और बरामदगी से संबंधित औसतन 50 मामले हर महीने दर्ज किए जा रहे हैं. वहीं बीते 23 माह में  राज्य के अलग-अलग जिले में 1155 हथियार बरामदगी से संबंधित मामले दर्ज हुए हैं.

 

नवंबर 2025 तक अवैध हथियार के 553 मामले दर्ज 

- जनवरी : 30

 

- फरवरी : 34

 

- मार्च : 65

 

- अप्रैल : 73

 

- मई : 40

 

- जून : 55

 

- जुलाई : 44

 

- अगस्त : 53

 

- सितंबर : 29

 

- अक्टूबर : 77

 

- नवंबर : 53

 

साल 2024 में अवैध हथियार के 602 मामले दर्ज

- जनवरी : 30

 

- फरवरी : 34

 

- मार्च : 65

 

- अप्रैल : 73

 

- मई : 40

 

- जून : 55

 

- जुलाई : 44

 

- अगस्त : 53

 

- सितंबर : 29

 

- अक्टूबर : 77

 

- नवंबर : 53

 

- दिसंबर : 55

 

झारखंड में बिकने वाले अवैध हथियार बिहार-UP से लाए जाते

राज्य के विभिन्न जिलों खासकर रांची, गिरिडीह और धनबाद में अवैध हथियारों की तस्करी और निर्माण के मामले सामने आ रहे हैं. पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि झारखंड में बिकने वाले अधिकांश अवैध हथियार बिहार के मुंगेर और उत्तर प्रदेश के वाराणसी व कानपुर से लाए जा रहे हैं. 

 

हाल ही में रांची पुलिस ने एक ऐसे गिरोह को पकड़ा था, जो व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हथियारों की तस्वीरें भेजकर ग्राहकों से डील करते थे.

 

एक सामान्य देसी कट्टा पांच से दस हजार रुपया में, जबकि मुंगेर निर्मित 9 एमएम की पिस्टल 35 से 50 हजार रुपया के बीच बेची जा रही है.

 

केवल तस्करी पर निर्भर नहीं हैं अपराधी

बता दें कि अपराधी केवल तस्करी पर निर्भर नहीं हैं. गिरिडीह और धनबाद जैसे क्षेत्रों में पुलिस ने कई अवैध हथियार निर्माण के मिनी फैक्ट्री को ध्वस्त किया है. इन कारखानों में न केवल कट्टे, बल्कि अर्ध-निर्मित पिस्टल और मैगजीन भी भारी मात्रा में बरामद किए गए हैं. 

 

हथियार बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीनें और 'खरवा मिट्टी' (पोटेशियम नाइट्रेट युक्त) का उपयोग करके विस्फोटक तैयार करने के भी साक्ष्य मिले हैं.

 

 

 

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