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झारखंड HC ने हिरासत में मौत के मामलों में गृह सचिव से फिर मांगा जवाब

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में हुई हिरासत में मौत (Custodial Death) की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए गृह सचिव को एक बार फिर व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है
 
  • शपथ पत्र में हिरासत में मौत के मामलों में न्यायिक जांच हुई है या नहीं, स्पष्ट नहीं थी

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में हुई हिरासत में मौत (Custodial Death) की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए गृह सचिव को एक बार फिर व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है.

 

कोर्ट ने गृह सचिव से स्पष्ट रूप से यह बताने को कहा है कि राज्य में हुई सभी हिरासत में मौत की घटनाओं में न्यायिक जांच (Judicial Enquiry) कराई गई है या नहीं. 

 

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि शपथ पत्र में यह जानकारी दी जाए कि न्यायिक जांच के दौरान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), नई दिल्ली द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन किया गया या नहीं. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता मो० शादाब अंसारी ने पक्ष रखा. उनकी ओर से कोर्ट को बताया गया कि गृह सचिव का शपथ पत्र अस्पष्ट है.

 

मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि पहले दाखिल किए गए शपथ पत्र में यह स्पष्ट नहीं था कि हिरासत में मौत के मामलों में न्यायिक जांच हुई है या नहीं. इसी कारण कोर्ट ने गृह सचिव को दोबारा विस्तृत और स्पष्ट शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया है.

 

दरअसल, सरकार की ओर से पूर्व की सुनवाई में कोर्ट को यह बताया गया था कि हिरासत में मृत्यु के सभी मामलों में, चाहे वह जेल में हुई हो या न्यायिक हिरासत में, मृत्यु की सूचना मजिस्ट्रेट को दी गई थी. जिस पर खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा था कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह पता चले कि मजिस्ट्रेट द्वारा जेल या न्यायिक हिरासत में हुई मौत के मामले में कोई जांच की गई थी या नहीं.

 

बता दें कि प्रार्थी मोहम्मद मुमताज अंसारी ने राज्य में जेल या न्यायिक हिरासत में हुई मौत मामले की जांच करने का आदेश देने का आग्रह कोर्ट से किया है.

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