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26 साल पुराने फायरिंग मामले में झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत, आरोपी बरी

झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 1999 के फायरिंग मामले में दोषी ठहराए गए मदन मरांडी को बड़ी राहत दी है. हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव और अभियोजन की कमियों के आधार पर आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया. साथ ही दुमका की निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को रद्द कर दिया है.
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  • दुमका की निचली अदालत द्वारा दी गई सजा रद्द

Ranchi :  झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 1999 के फायरिंग मामले में दोषी ठहराए गए मदन मरांडी को बड़ी राहत दी है. हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव और अभियोजन की कमियों के आधार पर आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया. साथ ही दुमका की निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को रद्द कर दिया है.

 

हाईकोर्ट ने मामले में पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी की ठोस पहचान साबित करने में असफल रहा है. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति दीपक रोशन की खंडपीठ ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ दायर क्रिमिनल अपील पर सुनवाई के दौरान यह फैसला दिया.

 

दरअसल सत्र न्यायालय, दुमका ने आरोपी को धारा 307 आईपीसी और आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष एवं 2 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी. अदालत के इस आदेश के खिलाफ 18 सितंबर 2003 को हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी.

 

क्या था मामला

अभियोजन के अनुसार, 16 अगस्त 1999 की रात लगभग 11 बजे सूचक सुनीलाल हांसदा पर घर में सोते समय गोली चलाई गई थी. आरोप था कि मदन मरांडी ने उसके कनपटी के पास गोली चलाई और शोर मचाने पर फरार हो गया.

 

इस घटना के पीछे दो वर्ष पूर्व एक शादी समारोह में हुए विवाद को कारण बताया गया था. हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी से कोई हथियार या आपत्तिजनक वस्तु बरामद नहीं हुई. कथित विवाद बहुत पुराना और सामान्य था, जिसे हत्या के प्रयास का ठोस मकसद नहीं माना जा सकता.

 

 

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