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झारखंड हाईकोर्ट ने बच्चों की कस्टडी के मामलों में तय की अंतरिम व्यवस्था, कलकत्ता की गाइडलाइन की होगी लागू

जब तक झारखंड हाईकोर्ट अपने स्तर पर स्थायी नियम तैयार नहीं करता, तब तक ऐसे मामलों में कलकत्ता हाईकोर्ट की चाइल्ड एक्सेस एंड कस्टडी गाइडलाइन-पेरेंटिंग प्लान-2025 से मदद ली जाएगी.
 

Ranchi : बच्चों की कस्टडी और माता-पिता के अधिकार से जुड़े विवादों की सुनवाई के लिए झारखंड हाईकोर्ट ने फिलहाल नयी अंतरिम व्यवस्था लागू की है. जब तक झारखंड हाईकोर्ट अपने स्तर पर स्थायी नियम तैयार नहीं करता, तब तक ऐसे मामलों में कलकत्ता हाईकोर्ट की चाइल्ड एक्सेस एंड कस्टडी गाइडलाइन-पेरेंटिंग प्लान-2025 से मदद ली जाएगी.

 

चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान से चल रही जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि गाइडलाइन को बाध्यकारी नियम के तौर पर नहीं देखा जाएगा. संबंधित अदालतें मामले की परिस्थितियों और बच्चे के हित को ध्यान में रखते हुए अपने न्यायिक विवेक से फैसला ले सकेंगी.

 

 

 

स्थायी नियम तैयार होने तक रहेगी व्यवस्था


हाईकोर्ट ने मामले को रूल्स कमेटी के समक्ष भेजने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है. कमेटी बच्चों की कस्टडी, मुलाकात के अधिकार और पैरेंटिंग प्लान से जुड़े मामलों के लिए स्थायी नियम तैयार करेगी.इसके बाद फुल कोर्ट की मंजूरी के आधार पर अंतिम व्यवस्था लागू की जाएगी. तब तक कलकत्ता हाईकोर्ट की वर्ष 2025 की गाइडलाइन को अंतरिम मार्गदर्शक के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा.

 

संबंधित अदालतों तक भेजी जाएगी गाइडलाइन


हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि गाइडलाइन की प्रति राज्य के सभी जिला जजों, फैमिली कोर्ट, मजिस्ट्रेट और ऐसे अन्य न्यायालयों को उपलब्ध कराई जाए, जहां बच्चों की कस्टडी, वैवाहिक विवाद और पारिवारिक मामलों की सुनवाई होती है.

 

बच्चों से मिलने के अधिकार पर भी लागू होगी व्यवस्था


इस अंतरिम व्यवस्था में केवल बच्चे की कस्टडी ही नहीं, बल्कि माता-पिता को बच्चे से मिलने और समय बिताने केअधिकार से जुड़े मामलों में भी गाइडलाइन का सहारा लिया जा सकेगा. अदालतों को हालांकि परिस्थितियों के अनुसार अलग आदेश देने की पूरी स्वतंत्रता रहेगी.

 

सुनवाई में यह भी बताया गया कि केरल, कर्नाटक और दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही बच्चों की कस्टडी और पैरेंट्स के एक्सेस से जुड़े मामलों के लिए दिशा-निर्देश जारी कर चुके हैं. इसके बाद झारखंड हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान से शुरू हुई जनहित याचिका का निष्पादन कर दिया.

 

 

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