Ranchi: हाइकोर्ट के अधिकारियों ने सरकार द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक मकान किराया भत्ता(HRA) नहीं लिया है. महालेखाकार द्वारा सरकार को भेजी गयी जांच रिपोर्ट में हाईकोर्ट के अधिकारियों द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक HRA लेने का ब्योरा गणना में हुई गलती का परिणाम है. महालेखाकार की रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि कोर्ट मैनेजर मनीषा दत्ता ने मार्च 2025 में निर्धारित सीमा 20% के बदले 88.57% HRA लिया. यह सही नहीं है. मामले की विस्तृत जांच में पाया गया कि कोर्ट मैनेजर मनीषा दत्ता 24-2-2025 से 24-3-2025 तक Child Care Leave पर थीं.
वेतन भत्ता नियमावली के तहत जो कर्मचारी जिस महीने में जितने दिनों तक काम करता है, उसे उतने ही दिनों का मूल वेतन और महंगाई भत्ता दिया जाता है. लेकिन उस महीने का HRA, Medical,TA सहित अन्य भत्ता पूरा दिया जाता है. इस नियम के तहत मार्च 2025 में मनीषा दत्ता को सिर्फ 18,877 रुपये के मूल वेतन के आधार पर महंगाई भत्ता की गणना की गयी. लेकिन मकान किराया आवास भत्ता उनके मूल वेतन के आधार पर 20% ही दिया गया.
महालेखाकार द्वारा जांच के लिए इस्तेमाल किये गये साफ्टवेयर ने मार्च महीने का बेसिक 18,877 रुपये के आधार पर HRA की तुलना कर उसे सरकार द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक बताया. मनीषा दत्ता का मूल बेसिक 83,600 रुपये है.
यह गलती असिस्टेंट रजिस्ट्रार नूतन कुमारी के मामले में भी हुआ है. नूतन कुमारी का मूल बेसिक 99,500 रुपये है. वह भी 25-8-2025 से 22-9-2025 तक Child Care Leave पर थी. महालेखाकार ने अपनी जांच रिपोर्ट में नूतन कुमारी द्वारा सितंबर 2025 में निर्धारित सीमा 20% से अधिक 75% लेने का उल्लेख किया है. यह सही नहीं है.
मामले की जांच में पाया गया कि वेतन भत्ता नियमावली के प्रावधानों के आलोक में नूतन कुमारी को सितंबर में काम के दिनों के हिसाब से 26,533 रुपये बेसिक के आधार पर मंहगाई भत्ता की गणना की गयी. लेकिन नियमानुसार उन्हें सितंबर महीने में पूरा HRA दिया गया.
महालेखाकार कार्यालय द्वारा सितंबर महीने में दिये गये पूरे HRA को 26,533 रुपये के बेसिक के आधार पर गणना कर निर्धारित सीमा से अधिक HRA लेने की रिपोर्ट सरकार को भेजी.
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