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झारखंड HC ने रिटायर्ड DEO की इंक्रीमेंट रोकने के आदेश को किया रद्द

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) सुशील कुमार को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा जारी दंडादेश को रद्द कर दिया, जिसमें सुशील कुमार के दो इंक्रीमेंट रोके गए थे. 

 

हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की एकलपीठ ने यह फैसला सुनाया. सुशील कुमार, जो पलामू के डीईओ थे, पर विभागीय जांच में छह गंभीर आरोप लगाए गए थे. 

 

इनमें प्रशासनिक अनियमितताएं, दुर्भावनापूर्ण स्थानांतरण, रिश्वतखोरी की आशंका, भेदभावपूर्ण फंड वितरण और अधीनस्थों से दुर्व्यवहार शामिल थे.

 

जांच अधिकारी ने 24 जुलाई 2020 की रिपोर्ट में सभी आरोप सिद्ध बताए, जिसके आधार पर 23 दिसंबर 2021 को दो इंक्रीमेंट रोकने का आदेश जारी हुआ. याचिकाकर्ता की वकील ने कहा कि जांच में मौखिक साक्ष्य का अभाव था. 

 

दस्तावेजों को बिना गवाहों से सिद्ध किए ही आधार बनाया गया. राज्य की ओर से दस्तावेज पर्याप्त बताए, लेकिन मौखिक साक्ष्य न होने की स्वीकारोक्ति की. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि विभागीय जांच में दस्तावेज स्वतः प्रमाण नहीं होते.

 

गवाहों से सिद्ध करना जरूरी है. चूंकि सुशील कुमार रिटायर हो चुके हैं और आरोप गंभीर नहीं हैं, नया जांच आदेश देना उचित नहीं. कोर्ट ने दंडादेश रद्द करते हुए, पेंशन व अन्य लाभ आठ सप्ताह में देने का आदेश दिया.

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