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झारखंड हाईकोर्ट ने दो अफीम तस्करों की सजा 8 से घटाकर की 3 साल

Ranchi News: अदालत ने राज कुमार साव उर्फ राजू कुमार और नगिना उर्फ नकुल यादव की ओर से दायर अलग-अलग आपराधिक अपीलों पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया. दोनों अपीलें लातेहार के प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत द्वारा चार मार्च 2025 को सुनायी गयी दोषसिद्धि और निर्धारित सजा के खिलाफ दायर की गयी थी.
 
फाइल फोटो
  • दोषसिद्धि रही बरकरार, 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी कायम

Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने अफीम तस्करी के मामले में दो मुजरिमों की सजा आठ साल से घटाकर तीन साल कर दी है. हालांकि  अदालत ने उनकी दोषसिद्धि बरकरार रखी और दोनों पर लगाये गये 50-50 हजार रुपये के जुर्माने में कोई बदलाव नहीं किया. अदालत ने कहा कि मामले में सजा बढ़ाने वाले कोई प्रतिकूल कारक सामने नहीं आये हैं और दोनों आरोपी युवा हैं. 


अदालत ने राज कुमार साव उर्फ राजू कुमार और नगिना उर्फ नकुल यादव की ओर से दायर अलग-अलग आपराधिक अपीलों पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया. दोनों अपीलें लातेहार के प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत द्वारा चार मार्च 2025 को सुनायी गयी दोषसिद्धि और निर्धारित सजा के खिलाफ दायर की गयी थी.


वाहन जांच के दौरान दो किलो अफीम बरामद होने का था आरोप

अभियोजन के अनुसार,  दो मई 2016 को हेरहंज थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ गश्त पर थे. इसी दौरान वाहन जांच के क्रम में मोटरसाइकिल सवार दो युवक पुलिस को देखकर भागने लगे. पुलिस ने पीछा कर उन्हें पकड़ लिया. तलाशी के दौरान मोटरसाइकिल की सीट पर रखे कपड़े के थैले से दो किलो अफीम बरामद होने का दावा किया गया. 

 

पुलिस के मुताबिक, दोनों ने पूछताछ में बताया था कि उन्होंने पांकी थाना क्षेत्र के केकरगढ़ गांव से अफीम खरीदी थी और उसे बेचने के लिए चतरा जा रहे थे. इस मामले में हेरहंज थाना कांड संख्या 09/2016 दर्ज किया गया था. सुनवाई के बाद निचली अदालत ने दोनों को एनडीपीएस एक्ट की धारा 17(बी) के तहत दोषी ठहराते हुए आठ-आठ साल के सश्रम कारावास और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनायी थी. जुर्माना नहीं देने पर एक-एक साल के अतिरिक्त सश्रम कारावास का भी प्रावधान था.

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बचाव पक्ष ने जब्ती प्रक्रिया पर उठाये सवाल

हाईकोर्ट में बचाव पक्ष ने दलील दी कि मामले में सभी गवाह पुलिसकर्मी थे और स्वतंत्र गवाह पेश नहीं किया गया. जब्ती सूची तैयार करने और अफीम का वजन करने के स्थान को लेकर गवाहों के बयानों में अंतर था. आरोपियों को मोटरसाइकिल के साथ पकड़े जाने या वहां से भागने के बाद पकड़ने के संबंध में भी अलग-अलग बातें सामने आयी थीं. इसके अलावा, जब्त पदार्थ को मालखाने में जमा करने और अदालत में पेश करने की प्रक्रिया में भी विसंगतियां बतायी गयीं. मोटरसाइकिल के स्वामित्व से संबंधित ठोस साक्ष्य नहीं होने की दलील भी दी गयी.


बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि यह आरोपियों का पहला अपराध है, वे युवा हैं और करीब डेढ़ साल तक जेल में रह चुके हैं. वर्ष 2016 से मुकदमे का सामना करने के कारण उन्हें काफी परेशानी हुई है. इसलिए सजा घटाकर जेल में बितायी गयी अवधि तक सीमित करने की मांग की गयी.

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