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आवारा कुत्तों पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त, राज्य और केंद्र से अनुपालन रिपोर्ट देने को कहा

Ranchi : मामले में एनएचएआई की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उसने 3 नवंबर को अपनी रिपोर्ट दाखिल कर दी है. अब मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर निर्धारित की है. मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. सरकार की ओर से अधिवक्ता विभोर मयंक ने पक्ष रखा.
 
आवारा कुत्ता

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन और सड़कों पर आवारा मवेशियों की समस्या को लेकर दायर स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई की. इस दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया है कि सेकेंड क्वार्टरली रिपोर्ट जल्द कोर्ट में दाखिल कर दी जाएगी. कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार और केंद्र सरकार को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है.

 

मामले में एनएचएआई (NHAI) की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उसने 3 नवंबर को अपनी रिपोर्ट दाखिल कर दी है. अब मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर निर्धारित की है. मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. सरकार की ओर से अधिवक्ता विभोर मयंक ने पक्ष रखा.

 

दरअसल, यह मामला सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान से दर्ज मामले 'सिटी हाउंडेड बाय स्ट्रेज, किड्स पे प्राइस' में जारी निर्देशों के अनुपालन से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने भी इसे स्वतः संज्ञान जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया है।.

 

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7 जिलों में ABC केंद्र संचालित हैं :  राज्य सरकार

पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने शपथ पत्र दायर कर बताया था कि नगरीय निकाय निदेशक को राज्य-स्तरीय नोडल अधिकारी बनाया गया है और उपायुक्तों की अध्यक्षता में जिला-स्तरीय समितियों का गठन किया गया है. सरकार के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में 726 संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों की पहचान की गई है. इनमें 521 स्कूल, 83 अस्पताल, 25 बस स्टैंड, 11 रेलवे स्टेशन, 33 पार्क और 53 बाजार शामिल हैं.

 

10 स्थायी पशु जन्म नियंत्रण (ABC) केंद्रों की स्थापना के लिए 21.06 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है. इसमें से 30 प्रतिशत यानी 6.31 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं. हालांकि, राज्य के 24 जिलों में से फिलहाल केवल सात जिलों में ही ABC केंद्र संचालित हैं. 

 

सरकार की ओर से दाखिल शपथ पत्र के मुताबिक, पिछले छह महीनों में 14,564 कुत्तों की नसबंदी की गई है, जबकि 18,021 कुत्तों का टीकाकरण हुआ है. इसके अलावा पशुपालन विभाग की ओर से किए गए 10,850 टीकाकरण को जोड़ने पर कुल आंकड़ा 28,871 पहुंच गया है. 

स्वास्थ्य विभाग के पास रेबीज रोधी वैक्सीन की 1,61,047 और इम्युनोग्लोबुलिन की 17,050 खुराक उपलब्ध हैं. बताया कि राज्य के 1,103 वार्डों में से 280 वार्डों में आवारा कुत्तों को खाना खिलाने के लिए स्थान चिह्नित किए गए हैं. हालांकि, कुत्तों को गोद लेने की व्यवस्था और राज्यस्तरीय हेल्पलाइन शुरू करने की प्रक्रिया अभी जारी हैय 



पशु कल्याण बोर्ड से मान्यता प्राप्त एजेंसियों के पैनल के लिए निविदा जारी की गई है. इस कारण आवारा कुत्तों को पकड़ने, हटाने या स्थानांतरित करने से संबंधित अलग-अलग आंकड़े फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं. 


केंद्र और एनएचएआई ने भी दायर किया था शपथ पत्र

वहीं  केंद्र सरकार ने शपथ पत्र में कहा था कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों से राज्यवार अनुपालन रिपोर्ट मांगी थी. इसके बाद रांची पासपोर्ट कार्यालय, एम्स देवघर और रांची स्थित राष्ट्रीय संस्थानों ने अपने परिसरों में घेराबंदी, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति और वैक्सीन की उपलब्धता से संबंधित जानकारी दी थी. 

 

केंद्र सरकार ने यह भी कहा था कि सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्य सूची का विषय है. जबकि एनएचएआई ने शपथ पत्र दाखिल कर बताया था कि राज्य में उसके अधीन करीब 3,500 किमी राजमार्ग हैं. इनमें 34 संवेदनशील स्थानों की पहचान की गई है. एनएचएआई के अनुसार, करीब 325 किलोमीटर सड़क पर चारदीवारी और फेंसिंग का काम किया गया है.

 

इसके अलावा दो अवैध कट बंद किए गए हैं, 31 अंडरपास और क्रॉसिंग बनाए गए हैं और 26 स्थानों से अतिक्रमण व मवेशी बांधने के ठिकानों को हटाया गया है. एनएचएआई ने यह भी बताया था कि उसकी सभी सात परियोजना कार्यान्वयन इकाइयों में 24 घंटे गश्ती वाहनों की तैनाती की गई है. हेल्पलाइन नंबर 1033 को स्थानीय पुलिस और प्रशासन से जोड़ा गया है. 

 

हालांकि, एनएचएआई का कहना था कि उसने 26 नवंबर 2025 को राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर आवश्यक सहयोग मांगा था. लेकिन राज्य सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला.  नोडल अधिकारी नियुक्त करने और गोशालाओं की सूची उपलब्ध कराने जैसे अनुरोध भी लंबित रहे. 

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