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झारखंड: हेल्थ सेक्टर में मेगा भर्ती, 942 डॉक्टर व फैकल्टी की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू

Ranchi : झारखंड सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत, सुलभ और आधुनिक बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और सरकारी अस्पतालों में खाली पड़े 942 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी है.

 

इनमें से 276 पदों के लिए कार्मिक विभाग द्वारा झारखंड लोक सेवा आयोग को अधियाचना भेज दी गई है. वहीं शेष 666 पदों के लिए विभाग ने कार्मिक विभाग को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि इन पदों को भरने के लिए जेपीएससी को अधियाचना भेजी जाए.

 

सरकार ने इस बहाली प्रक्रिया को तीन प्रमुख हिस्सों में बांटा है ताकि चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं दोनों को मजबूत किया जा सके. सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई की व्यवस्था सुधारने के लिए 180 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की जाएगी.

 

इनमें 155 पद नियमित और 25 पद बैकलॉग के हैं. ये नियुक्तियां मेडिसिन, सर्जरी, एनेस्थीसिया, स्त्री रोग और शिशु रोग जैसे विभागों में होंगी. यह प्रक्रिया झारखंड चिकित्सा शिक्षा सेवा नियमावली 2018 और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के मानकों के अनुसार पूरी की जाएगी.

 

इसके अलावा राज्य के पांच प्रमुख मेडिकल कॉलेजों धनबाद, जमशेदपुर, हजारीबाग, पलामू और दुमका में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को मजबूत करने के लिए 96 विशेषज्ञ फैकल्टी की नियुक्ति होगी. इन पदों में न्यूरो सर्जरी, कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी और ऑन्कोलॉजी जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है. इससे गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को बाहर जाने की जरूरत कम होगी.

 

जिला और अनुमंडल अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए 666 विशेषज्ञ डॉक्टरों की बहाली की जाएगी. इनमें 506 पद नियमित और 160 बैकलॉग के हैं. इस संबंध में भी कार्मिक विभाग को जेपीएससी के माध्यम से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया गया है. इनमें सबसे ज्यादा पद फिजिशियन और शिशु रोग विशेषज्ञ के हैं. इसके अलावा एनेस्थीसिया और स्त्री रोग विशेषज्ञ के पद भी अच्छी संख्या में शामिल हैं. सरकार 335 चिकित्सा पदाधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया भी आगे बढ़ा रही है, जो अभी प्रक्रियाधीन है.

 

विशेषज्ञों का कहना है कि यह बहाली अभियान राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है. इससे अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर होगी और मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिल सकेगा. सरकार की इस पहल से साफ है कि झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है और उन्हें राष्ट्रीय स्तर के अनुरूप विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है.

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