Ranchi : झारखंड के सिनेमा घरों में चले नागपुरी फिल्म सेरेंग पर विवाद शुरू हो चुका है. इसको लेकर केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलु मुंडा, प्रधान महासचिव अशोक मुंडा, महासचिव महादेव टोप्पो, पूर्व मेयर प्रत्याशी सुरेंद्र लिंडा, मुख्य पाहन जगलाल पाहन, कोषाध्यक्ष जगरनाथ तिर्की समेत अन्य लोगों ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के सामने मीडिया से रूबरू हुए. बबलु मुंडा ने कहा कि झारखंड में बनाई गई फिल्म सेरेंग के निर्देशक, नायक-नायिका समेत अन्य कलाकारों पर कार्रवाई की मांग की गई.
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सेरेंग फिल्म में झारखंड की आदिवासी अस्मिता को छोड़कर लव जिहाद को बढ़ावा दिया गया है. इस फिल्म में मुंडा आदिवासी और मुसलमान युवक से प्रेम विवाह को दिखाया गया है. इसको लेकर अनुसूचित जनजाति आयोग से भी शिकायत की गई हैं. जनजाति सुरक्षा मंच के संदीप उरांव ने कहा कि झारखंड में सेरेंग फिल्म पर आदिवासी समाज को कोलहिन बतलाया गया है. मसना में धार्मिक झंडा को गाड़ते हुए दिखाया गया है.
जगलाल पाहन ने बताया कि झारखंड में अस्त्तित्व और अस्मिता का ख्याल किए बगैर सेरेंग फिल्म में मुस्लिम युवक और आदिवासी युवती का विवाह को दिखाया गया है, जो कि समाज की आदिवासी जमीन लूट की ओर इशारा करते हैं. आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और परंपराएं वर्षभर विभिन्न पर्व-त्योहारों के माध्यम से दिखाई देती हैं.
जनजाति सुरक्षा मंच के संदीप उरांव ने कहा कि सेरेंग’ का अर्थ चट्टान होता है. संदीप उरांव ने आरोप लगाया कि फिल्म में आदिवासी समाज के लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया है और समाज को अपमानित करने का प्रयास किया गया है. उन्होंने कहा कि झारखंड में बनने वाली फिल्मों में आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और परंपराओं को सम्मानजनक तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए. लेकिन फिल्म की कहानी और प्रस्तुति पर समाज को आपत्ति है. उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रस्तुति से आदिवासी समाज की बेटियों और सांस्कृतिक मूल्यों को लेकर गलत संदेश जाता है. साथ ही आदिवासी जमीन और पहचान से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को भी गलत तरीके से पेश किया गया है.
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