- - हर चार किलोमीटर के रेडियस में रहेगा सक्रिय
- - पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद राज्यभर में होगा विस्तार
Ranchi : झारखंड में आकाशीय बिजली (वज्रपात) की समस्या सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा है, जिससे हर साल सैकड़ों इंसानों और मवेशियों की जान चली जाती है. इससे निपटने के लिए राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने अब अत्याधुनिक तकनीक से रोकथाम की योजना बनाई है. विभाग एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत राज्य में 'इलेक्ट्रिक फील्ड मिल' (EFM) इंस्टॉल करने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है. यह उपकरण वज्रपात की सटीक भविष्यवाणी करने में सक्षम है, जिससे जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सकेगा.
इन जिलों में होगी शुरुआत
योजना के पहले चरण में राज्य के पांच संवेदनशील जिलों का चयन किया गया है, जिनमें राजधानी रांची सहित गुमला, बोकारो, पलामू और पश्चिमी सिंहभूम शामिल हैं. इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सटीकता और चेतावनी देने की समय-सीमा है.
विभाग के अनुसार, यह सिस्टम 100 प्रतिशत सटीकता के साथ कार्य करेगा और चार किलोमीटर के रेडियस में सक्रिय रहेगा. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह उपकरण वज्रपात होने से आधे घंटे से लेकर दो घंटे पहले ही अलर्ट जारी कर देगा.
कैसे करेगा काम
इलेक्ट्रिक फील्ड मिल एक ऐसा स्मार्ट डिवाइस है जो हवा में मौजूद बिजली के दबाव को मापता है. जब भी आसमान में बिजली कड़कने वाली होती है, तो गिरने से काफी पहले वहां के वातावरण में बिजली का चार्ज बढ़ जाता है. यह मशीन उस बदलाव को तुरंत पकड़ लेती है और खतरे का सिग्नल भेज देती है.
सुरक्षित स्थानों पर जाने का मिल सकेगा पर्याप्त समय
चूंकि यह आधे से दो घंटे पहले ही बता देता है कि बिजली कहां गिर सकती है, इसलिए खेतों में काम कर रहे किसानों या खुले में मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने का पर्याप्त समय मिल सकेगा. पांच जिलों में पायलट प्रोजेक्ट की सफलता और परिणामों की समीक्षा करने के बाद इस तकनीक का विस्तार पूरे राज्य में किया जाएगा.
आपदा प्रबंधन विभाग का मानना है कि यह तकनीक झारखंड जैसे भौगोलिक परिवेश वाले राज्य के लिए जीवनरक्षक साबित होगी, जहां वज्रपात की घटनाएं अत्यधिक होती हैं.
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