Ranchi: झारखंड में मलेरिया, डेंगू, फाइलेरिया और अन्य वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सभी विभागों के साथ मिलकर काम करने का फैसला किया है. गुरुवार को नेपाल हाउस में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक हुई.
पंचायत स्तर तक चलाया जाएगा अभियान
बैठक में अपर मुख्य सचिव ने कहा कि मलेरिया, डेंगू, फाइलेरिया, चिकनगुनिया, कालाजार और जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारियों से निपटना सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है. इसके लिए ग्रामीण विकास, नगर विकास, पंचायती राज, शिक्षा, श्रम और पेयजल एवं स्वच्छता समेत सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा.
इसे भी पढ़ें:
उन्होंने कहा कि इन बीमारियों की रोकथाम को जन-आंदोलन बनाया जाए. इसके लिए सभी विभागों की जिम्मेदारियां तय कर जिला से लेकर पंचायत स्तर तक अभियान चलाया जाएगा.
मलेरिया से पूर्वी व पश्चमी सिंहभूम जिला ज्यादा प्रभावित
बैठक में बताया गया कि जून 2026 तक झारखंड में मलेरिया के 16,728 मामले सामने आए हैं. इनमें सबसे अधिक 6,527 मामले पूर्वी सिंहभूम और 6,172 मामले पश्चिमी सिंहभूम में दर्ज किए गए. यानी राज्य के करीब 76 प्रतिशत मलेरिया मरीज इन्हीं दो जिलों में मिले हैं. डेंगू की बात करें तो जून 2026 तक राज्य में 77 मामले दर्ज हुए हैं. इनमें सबसे ज्यादा 27 मरीज रांची से हैं.
अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मलेरिया प्रभावित इलाकों में समय पर जांच, इलाज, दवाओं की उपलब्धता, मच्छरों पर नियंत्रण और लोगों को जागरूक करने का काम तेज किया जाए.
फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि सर्वजन दवा सेवन (MDA) अभियान के दौरान सिर्फ दवा बांटना ही काफी नहीं है. यह भी सुनिश्चित किया जाए कि लोग स्वास्थ्यकर्मियों की मौजूदगी में दवा खाएं. साथ ही फाइलेरिया मरीजों के इलाज, हाइड्रोसील सर्जरी, एमएमडीपी किट और नियमित फॉलो-अप पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए.
बैठक में विभिन्न विभागों ने गांवों, स्कूलों, कॉलेजों, शहरी निकायों, स्वयं सहायता समूहों और औद्योगिक क्षेत्रों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने, जल जमाव रोकने, साफ-सफाई बढ़ाने और मलेरिया व फाइलेरिया नियंत्रण अभियान को मजबूत करने पर सहमति जताई.
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के क्षेत्रीय निदेशक रविशंकर, एनएचएम के एमडी शशि प्रकाश झा, उप सचिव अश्विनी कुमार, विभिन्न विभागों के अधिकारी और विश्व स्वास्थ्य संगठन, पीरामल तथा सिनी के प्रतिनिधि मौजूद रहे. उन्होंने रोगों की निगरानी, तकनीकी सहयोग और जनजागरूकता अभियान में सहयोग जारी रखने की बात कही.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें


Leave a Comment