Ranchi : राज्य में बारिश और उमस बढ़ने के साथ सर्पदंश के मामलों में तेजी आने लगी है. इसको देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सर्पदंश को अधिसूचित रोग घोषित कर दिया है और सभी सरकारी व निजी स्वास्थ्य संस्थानों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है.
संदिग्ध व पुष्ट मामले की रिपोर्ट देना अनिवार्य
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने सभी सिविल सर्जनों को नेशनल स्नेकबाइट मैनेजमेंट प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन कराने का निर्देश दिया है. विभाग ने कहा है कि सर्पदंश के हर संदिग्ध और पुष्ट मामले की रिपोर्ट देना अब अनिवार्य होगा.
सभी अस्पतालों को एंटी स्नेक वेनम सीरम रखने का निर्देश
सभी जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों में एंटी स्नेक वेनम सीरम उपलब्ध रखने का निर्देश दिया गया है. स्वास्थ्य विभाग ने साफ कहा है कि यह दवा सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त मिलेगी.
गाइडलाइन में बताया गया है कि सांप काटने पर घाव को काटना, जहर चूसना या ज्यादा कसकर बांधना खतरनाक हो सकता है. मरीज को शांत रखें और तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं. जरूरत पड़ने पर 108 एम्बुलेंस सेवा का इस्तेमाल किया जा सकता है.
स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि समय पर इलाज मिलने से सर्पदंश से होने वाली ज्यादातर मौतों को रोका जा सकता है.
3 साल में 3686 बढ़े सर्पदंश के मामले
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में सर्पदंश के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. वर्ष 2022 में सर्पदंश के 392 मामले सामने आए थे, जो साल 2025 में बढ़कर 4078 पहुंच गई. इस दौरान 26 लोगों की जान भी चली गई. वहीं वर्ष 2026 में अप्रैल तक सर्पदंश के 561 मामले दर्ज किए जा चुके हैं.
विभाग ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग झाड़-फूंक और ओझाओं के चक्कर में पड़ जाते हैं, जिससे इलाज में देरी होती है और मौत का खतरा बढ़ जाता है. इसी को देखते हुए लोगों को जागरूक करने के लिए एएनएम, सहिया और स्वास्थ्य कर्मियों को जिम्मेदारी दी गई है.
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