Ranchi : सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में पेयजल स्वच्छता विभाग ने ठोस कचरा प्रबंधन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इसमें ठोस कचरा प्रबंधन के नियमों का उल्लंघन करने वाले ग्राम पंचायतों पर दंड लगाने के लिए नियम बनाने का आदेश दिया गया है. विभाग ने यह दिशा-निर्देश भोपाल नगर निगम बनाम डॉक्टर सुभाष सी पांडेय के मामले में पांच मई को पारित आदेश के आलोक मे जारी किया है.
विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि भारत स्वच्छता मिशन ग्रामीण-2 के अंतर्गत ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन की पूरी जिम्मेवारी पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की है. ग्रामीण स्तर पर Convergence के आधार पर कचरा प्रबंधन के लिए 16वें वित्त आयोग द्वारा 50% बेसिक ग्रांट मनरेगा योजना के माध्यम से देने का प्रावधान है. इसके अलावा नगर विकास विभाग द्वारा भी गांवों को लिंक किये जाने का प्रावधान है.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में करने होंगे ये काम :
- जिला स्तर पर स्वच्छता का काम करने वालों का पंचायत सचिवों तक पहुंचना सुनिश्चित करना है.
- जिलों को ग्राम स्तर पर कचरा प्रबंधन की दिशा में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रोत्साहित करना है. इसका पालन नहीं करने वाले ग्राम पंचायतों को दंडित करने के लिए नियम बनाये जाएं.
- ठोस कचरा प्रबंधन के लिए जिला स्तर पर एक विशेष सेल का गठन किया जाये. इस सेल पर ग्राम पंचायतों में कचरा प्रबंधन को सुनिश्चित कराने की जिम्मेवारी होगी.
- कचरा प्रबंधन के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश को क्षेत्रीय भाषा में अनुवाद कर बांटा जायेगा.
- ग्राम पंचायत स्तर पर ग्रामीण संस्थानों को ठोस कचरे के स्रोतों को अलग करने की व्यवस्था के लिए प्रोत्साहित किया जाये. कचरा उत्पन्न करने वालों की Door to Door Mapping की जाए.
- ग्रामीणों को ठोस और तरल कचरा अलग-अलग रखने के निर्देश दिया जाएं.
- ग्रामीण स्तर पर Door to Door कचरा उठाव सुनिश्चित किया जाए.
- ग्रामीण स्तर पर बल्क कचरा उत्पन्न करने वालों का ब्योरा जुटाकर भारत सरकार द्वारा तैयार किये जाने वाले पोर्टल पर अपलोड किया जाए.
- ठोस कचरा प्रबंधन नियमावली 2026 के आलोक में काम करने वालों के प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए.
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