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Jharkhand News: बजट खर्च में FSL व अभियोजन निदेशालय फिसड्डी

झारखंड सरकार के गृह विभाग के अंतर्गत आने वाले फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) और अभियोजन निदेशालय बजट खर्च करने के मामले में काफी पीछे हैं. वित्तीय वर्ष 2025-26 के वास्तविक व्यय के आंकड़ों के अनुसार, इन महत्वपूर्ण तकनीकी इकाइयों को आवंटित की गई राशि का भी पूरा उपयोग नहीं हो सका है.
 
  • केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में गृह विभाग की सुस्ती

Ranchi: झारखंड सरकार के गृह विभाग के अंतर्गत आने वाले फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) और अभियोजन निदेशालय बजट खर्च करने के मामले में काफी पीछे हैं. वित्तीय वर्ष 2025-26 के वास्तविक व्यय के आंकड़ों के अनुसार, इन महत्वपूर्ण तकनीकी इकाइयों को आवंटित की गई राशि का भी पूरा उपयोग नहीं हो सका है. एक ओर जहां पुलिस निदेशालय और अन्य सुरक्षा अंगों ने बजट का लगभग शत-प्रतिशत इस्तेमाल किया है, वहीं वैज्ञानिक जांच और कानूनी पैरवी से जुड़ी इकाइयां आवंटित धनराशि को खर्च करने में सुस्त साबित हुई हैं.

आधा बजट भी नहीं खर्च कर सका FSL

जानकारी के अनुसार, एफएसएल (विधि विज्ञान प्रयोगशाला) के व्यय में सबसे ज्यादा कमी देखी गई है. विभाग ने कुल आवंटित बजट का मात्र 48.25% ही खर्च किया है, जिसका सीधा अर्थ है कि आवंटित राशि का आधा हिस्सा भी इस्तेमाल नहीं हो पाया. इसी प्रकार, अपराधियों को सजा दिलाने के लिए जिम्मेदार अभियोजन निदेशालय ने भी अपनी आवंटित राशि का केवल 64.72% ही उपयोग किया है. जानकारों का मानना है कि इन विभागों में बजट का पूरा उपयोग न होना सीधे तौर पर राज्य की न्याय प्रक्रिया और वैज्ञानिक जांच की गति को प्रभावित करता है.

सुरक्षा बलों का शानदार प्रदर्शन

गृह विभाग की अन्य सेवाओं ने बजट प्रबंधन में बेहतर तालमेल दिखाया है. पुलिस निदेशालय ने आवंटित 267.80 करोड़ रुपये में से 99.40% राशि खर्च की है. वहीं, होमगार्ड और अग्निशमन सेवाओं ने अपने आवंटित बजट का पूरा 100% हिस्सा खर्च किया है. कारा निदेशालय में भी विकास कार्यों पर आवंटित राशि का 99.42% उपयोग दर्ज हुआ है. सुरक्षा बल बजट के उपयोग में तकनीकी शाखाओं से काफी आगे रहे हैं.

 

केंद्र की योजनाओं में भी पीछे रह गया विभाग

पूरी वित्तीय स्थिति को देखें तो राज्य योजना के तहत गृह विभाग के लिए कुल 662.22 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई थी, जिसके सापेक्ष 518.70 करोड़ रुपये आवंटित किए गए. इस आवंटित राशि में से वास्तविक व्यय 514.10 करोड़ रुपये रहा है. वहीं केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत 225.66 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली थी, जिसमें से 181.27 करोड़ रुपये आवंटित हुए और वास्तविक खर्च मात्र 159.73 करोड़ रुपये ही हो सका.

 

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