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Jharkhand News : करोड़ों खर्च के बाद भी मलेरिया बना आफत, 7 माह में आए 13 हजार के पार केस

झारखंड सरकार ने मलेरिया नियंत्रण के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 3 करोड़ 19 लाख 79 हजार 271 रुपये खर्च करने की स्वीकृति दी थी. यह राशि मलेरिया प्रभावित जिलों में डीडीटी छिड़काव अभियान के खर्च के लिए जारी हुई थी. इसके बावजूद राज्य में संक्रमण पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं हो सका.
 

Ranchi :  झारखंड सरकार ने मलेरिया नियंत्रण के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 3 करोड़ 19 लाख 79 हजार 271 रुपये खर्च करने की स्वीकृति दी थी. यह राशि मलेरिया प्रभावित जिलों में डीडीटी छिड़काव अभियान के खर्च के लिए जारी हुई थी. इसके बावजूद राज्य में संक्रमण पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं हो सका.

 

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में 42,236 मलेरिया के मामले दर्ज किए गए, जबकि वर्ष 2026 में जनवरी से मई के बीच ही 12,342 मरीज सामने आ चुके हैं. 

 

 

स्वास्थ्य विभाग के आदेश के अनुसार, स्वीकृत राशि में 3 करोड़ 16 लाख 16 हजार 271 रुपये छिड़काव कर्मियों की मजदूरी पर और 3 लाख 63 हजार रुपये परिवहन व्यय पर खर्च किए जाएंगे. विभाग ने यह राशि राज्य के 10 सर्वाधिक प्रभावित जिलों में डीडीटी छिड़काव अभियान के लिए जारी की है.

 

सबसे अधिक 68.67 लाख पश्चिमी सिंहभूम को आवंटित किए गए हैं. इसके बाद लातेहार को 66.46 लाख, गढ़वा को 47.75 लाख, सरायकेला-खरसावां को 42.73 लाख, खूंटी को 23.42 लाख, पूर्वी सिंहभूम को 18.01 लाख, गुमला को 16.26 लाख, लोहरदगा को 14.02 लाख, रांची को 13.77 लाख और सिमडेगा को 8.64 लाख दिए गए हैं. ये सभी जिले लंबे समय से मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं.

 

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले वर्षों में संक्रमण में लगातार उतार-चढ़ाव रहा है. वर्ष 2018 में 57,113, 2019 में 36,522, 2022 में करीब 19 हजार, 2023 में 34,087, 2024 में 42,352 और 2025 में 42,236 मामले दर्ज किए गए. लगातार दो वर्षों तक 42 हजार से अधिक मरीज मिलने से राज्य में मलेरिया की चुनौती बरकरार है.

 

वर्ष 2026 में भी संक्रमण का दबाव कम नहीं हुआ है. जनवरी से मई के बीच 12,342 मामले दर्ज किए गए, जो वर्तमान में 13,000 के पार माना जा रहा है. इनमें पश्चिमी सिंहभूम में 4,891, पूर्वी सिंहभूम में 4,822, गोड्डा में 874, खूंटी में 612 और सरायकेला-खरसावां में 514 मरीज मिले. इन पांच जिलों में ही राज्य के अधिकांश मामले दर्ज हुए.

 

जून में पूर्वी सिंहभूम के पोटका प्रखंड में हालात और गंभीर हो गए. चार बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पोटका, मुसाबनी, घाटशिला और डुमरिया में हाई अलर्ट घोषित किया. विशेष जांच अभियान में 507 लोगों की स्क्रीनिंग के दौरान 51 नए मरीज मिले. जबकि 13 मरीज गंभीर पाए गए. गंभीर मरीजों को पोटका सीएचसी, MGM medical कॉलेज अस्पताल और खासमहल सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया.

 

संक्रमण रोकने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में 12 मेडिकल टीमों को लगाया गया. बाद में MGM medical College के 108 डॉक्टरों को भी विशेष अभियान में तैनात किया गया. टीमों को घर-घर स्क्रीनिंग, दवा वितरण और गंभीर मरीजों को तत्काल अस्पताल भेजने की जिम्मेदारी दी गई.

 

स्वास्थ्य विभाग डीडीटी छिड़काव, मच्छरदानियों का वितरण, स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान चला रहा है. हालांकि 2025 और 2026 के आंकड़े बताते हैं कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और आसपास के जिले अब भी राज्य के सबसे बड़े मलेरिया हॉटस्पॉट बने हुए हैं.

 

 

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