Ranchi News : झारखंड सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग ने राज्य के सभी शहरी निकायों में मांस और मांस उत्पादों के विनिर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण और बिक्री से जुड़े कारोबारियों के लिए नई नियमावली अधिसूचित की है.
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झारखंड म्युनिसिपल रेगुलेशन 2026 के तहत अब नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में मीट कारोबार या स्लॉटर हाउस चलाने के लिए स्थानीय निकाय से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य कर दिया गया है. खाद्य सुरक्षा एवं मानक नियमों के तहत लाइसेंस प्राप्त करने से पूर्व यह एनओसी हासिल करना हर फूड बिजनेस ऑपरेटर के लिए जरूरी होगा.
तय स्थानों पर ही होगा कारोबार
नई नियमावली के अनुसार, शहरी स्थानीय निकाय अपने क्षेत्राधिकार में स्लॉटर हाउस और मीट की दुकानों के लिए विशिष्ट स्थान निर्धारित करेंगे. तय किए गए स्थानों के अलावा किसी भी अन्य जगह पर पशु वध या मांस बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा.
इसके साथ ही स्लॉटर हाउस और मीट दुकानों को सब्जी व फल बाजार से दूर, उचित ऊंचाई और स्वच्छ वातावरण में स्थापित करना होगा, ताकि दुर्गंध, मक्खियों और गंदगी से आम जनता को परेशानी न हो.
नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि झारखंड गोवंशीय पशु वध प्रतिषेध अधिनियम, 2005 और पशु क्रूरता निवारण नियमों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करना होगा.
एनओसी की प्रक्रिया और इसके मानक
प्रक्रिया के तहत एनओसी प्राप्त करने के लिए कारोबारियों को 100 रुपये के प्रोसेसिंग शुल्क के साथ आवेदन करना होगा. आवेदन के साथ भूमि या दुकान के स्वामित्व अथवा किराएदारी के दस्तावेज, होल्डिंग टैक्स रसीद, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट शुल्क रसीद, आधार कार्ड, लेआउट प्लान और कचरा प्रबंधन योजना जमा करना अनिवार्य होगा.
इसके बाद स्थानीय निकाय द्वारा गठित निरीक्षण दल स्थल का भौतिक सत्यापन करेगा. जांच दल द्वारा स्वच्छता, जल निकासी, उपकरणों की स्थिति, वेंटिलेशन, कचरा निस्तारण और 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक जैसे कई तय मानकों की पड़ताल के बाद ही एनओसी जारी करने की सिफारिश की जाएगी.
खाद्य लाइसेंस की अवधि तक मान्य होगा एनओसी
विभाग ने स्पष्ट किया है कि एनओसी की वैधता खाद्य सुरक्षा लाइसेंस की अवधि तक ही मान्य रहेगी और लाइसेंस नवीनीकरण के समय पुनः अपडेटेड एनओसी प्राप्त करना अनिवार्य होगा. इसके अलावा, स्लॉटर हाउस परिसर का उपयोग सीधे मांस बेचने या रहने-सोने के लिए करने पर रोक लगाई गई है. इस नई व्यवस्था से शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता के मानकों में सुधार होगा और नागरिकों को सुरक्षित व स्वच्छ खाद्य उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे.
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