Ranchi : झारखंड को बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और पावर सरप्लस राज्य बनाने वाली पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) परियोजना से पूर्ण उत्पादन की समय-सीमा तय हो गई है. आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस मेगा पावर प्रोजेक्ट की सभी इकाइयों से अगले छह महीनों के भीतर पूरी क्षमता के साथ बिजली उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा. उत्पादन की इस नई समय-सीमा के बाद राज्य को अपनी जरूरतों से करीब 600 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने लगेगी, जिससे औद्योगिक विकास की रफ्तार तेज होगी.
चालू हो चुकी है पहली यूनिट, दूसरी भी उत्पादन को तैयार
एनटीपीसी और झारखंड सरकार के इस संयुक्त उपक्रम के तहत पतरातू में 800-800 मेगावाट की कुल तीन इकाइयां (2400 मेगावाट) स्थापित की जा रही हैं. परियोजना से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, 800 मेगावाट की पहली इकाई से उत्पादन पहले ही शुरू किया जा चुका है, जिससे उत्पादित बिजली का 85 फीसदी हिस्सा राज्य को मिल रहा है. वहीं, दूसरी इकाई भी अब पूरी तरह बनकर तैयार है और इससे बहुत जल्द व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने जा रहा है.
अंतिम इकाई से छह महीने में शुरू होगा उत्पादन
परियोजना प्रबंधन ने तीसरी और अंतिम 800 मेगावाट की इकाई से उत्पादन शुरू करने के लिए अगले छह महीने का लक्ष्य निर्धारित किया है. इस अंतिम इकाई पर काम युद्ध स्तर पर चल रहा है. अधिकारियों का अनुमान है कि आगामी छह महीनों के भीतर तीनों इकाइयां ग्रिड से जुड़ जाएंगी, जिसके बाद झारखंड के पास सरप्लस बिजली होगी. इस अतिरिक्त बिजली को अन्य राज्यों को बेचकर प्रदेश के राजस्व में बढ़ोतरी की जाएगी.
निर्बाध बिजली से उद्योगों में आएगी क्रांति
आगामी महीनों में उत्पादन क्षमता पूरी होने के साथ ही राज्य में बिजली का संकट हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा. यह पूरा प्लांट आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल 'अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल' तकनीक पर आधारित है, जिससे तय समय के भीतर कम उत्सर्जन में अधिक बिजली पैदा की जा सकेगी. पूरी क्षमता से उत्पादन शुरू होते ही स्थानीय कल-कारखानों को चौबीसों घंटे बिना रुकावट बिजली मिलेगी, जिससे नए निवेशकों को आकर्षित करना और रोजगार के अवसर बढ़ाना आसान हो जाएगा.
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