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Jharkhand News : 5 लाख हेक्टेयर में दलहन-तिलहन की तैयारी, कृषि मंत्री ने केंद्र से मांगा विशेष पैकेज

Ranchi News : नई दिल्ली के पूसा स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में आयोजित सम्मेलन में मंत्री ने कहा कि झारखंड में रबी मौसम के दौरान करीब 12 लाख हेक्टेयर राइस फॉलो क्षेत्र उपलब्ध है. इसमें से 5–6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों के अंतर्गत लाने की क्षमता है. उन्होंने आगामी रबी सीजन में ही 50 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव रखा.
 
शिवराज चौहान से मिली कृषि मंत्री

Ranchi News : झारखंड में धान कटने के बाद खाली रहने वाले करीब 5 लाख हेक्टेयर राइस फॉलो क्षेत्र को दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों के दायरे में लाने की तैयारी है. राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन–रबी अभियान में झारखंड की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने केंद्र सरकार के सामने इस महत्वाकांक्षी योजना का प्रस्ताव रखते हुए इसके लिए विशेष वित्तीय और तकनीकी पैकेज की मांग की.

 

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नई दिल्ली के पूसा स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में आयोजित सम्मेलन में मंत्री ने कहा कि झारखंड में रबी मौसम के दौरान करीब 12 लाख हेक्टेयर राइस फॉलो क्षेत्र उपलब्ध है. इसमें से 5–6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों के अंतर्गत लाने की क्षमता है. उन्होंने आगामी रबी सीजन में ही 50 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव रखा.

 

दलहन का रकबा एक साल में 93 हजार हेक्टेयर बढ़ा

झारखंड में दलहन के क्षेत्र विस्तार को भी मंत्री ने सम्मेलन में प्रमुखता से रखा. खरीफ 2025-26 में दलहन का क्षेत्र करीब 2.80 लाख हेक्टेयर था, जो खरीफ 2026-27 में बढ़कर करीब 3.73 लाख हेक्टेयर हो गया. यानी एक साल में लगभग 93 हजार हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है.

 

देवघर और दुमका में करीब 1,000-1,000 हेक्टेयर के अरहर क्लस्टर विकसित किए गए हैं. मंत्री ने क्लस्टर आधारित खेती को राज्य के दूसरे क्षेत्रों तक विस्तार देने की जरूरत बताई.

 

Farmer ID में 1932 के रिकॉर्ड बनी चुनौती

सम्मेलन में झारखंड के पुराने भूमि अभिलेखों को लेकर भी राज्य की समस्या सामने रखी गई. मंत्री ने कहा कि राज्य का अंतिम व्यापक भूमि सर्वेक्षण 1932 में हुआ था. पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान जमीनी स्थिति में अंतर के कारण AgriStack के तहत Farmer ID बनाने में व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं.

 

उन्होंने केंद्र से झारखंड के लिए Farmer ID निर्माण में विशेष लचीलापन देने और बड़े पैमाने पर ID बनने तक इसे PM-KISAN समेत जरूरी किसान कल्याण योजनाओं का अनिवार्य आधार नहीं बनाने का आग्रह किया.

 

KCC के लिए बैंकों को चलाना होगा saturation drive

मंत्री ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की कम कवरेज का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने बैंकों के माध्यम से पात्र किसानों की पहचान कर उन्हें KCC से जोड़ने के लिए समयबद्ध saturation drive चलाने की मांग की, ताकि किसानों की संस्थागत कृषि ऋण तक पहुंच बढ़ाई जा सके.

 

छोटे किसानों के लिए 90% तक कृषि यंत्र सब्सिडी की मांग

झारखंड के छोटे, सीमांत और आदिवासी किसानों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए मंत्री ने कृषि यंत्रीकरण के लिए केंद्र से विशेष सहायता की मांग की. उन्होंने SMAM के तहत कृषि यंत्रों पर पात्र इकाई लागत के 90 प्रतिशत तक सब्सिडी देने पर विचार करने का आग्रह किया.

 

पलांडू को राष्ट्रीय शोध संस्थान बनाने का प्रस्ताव

शिल्पी नेहा तिर्की ने रांची के पलांडू स्थित फार्म रिसर्च सेंटर को ‘National Institute for Horticulture and Tribal Farming Research’ के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी केंद्र के सामने रखा. इसके लिए आधारभूत संरचना, शोध सुविधाओं और मानव संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की गई.

 

केंद्रीय कृषि मंत्री को झारखंड आने का न्योता

मंत्री ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को झारखंड आने का निमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया. शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि झारखंड की कृषि को अग्रणी पंक्ति में लाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर काम करना होगा.

 

उन्होंने कहा कि राज्य की कृषि को सिर्फ उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय किसान आय, फसल विविधीकरण, तकनीक, प्रसंस्करण, बाजार और स्थानीय संसाधनों से जोड़कर व्यापक कृषि अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित करने की जरूरत है.

 

दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री, केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, ICAR के प्रतिनिधि और कृषि क्षेत्र से जुड़े हितधारक शामिल हुए.

 

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