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Jharkhand News : बिना नक्शा पास भवनों को नियमित करने की तैयारी, 60 दिनों के भीतर करें आवेदन

रांची में गुरुवार को राज्य सरकार ने लाखों भवन मालिकों को बड़ी राहत देने वाला फैसला लिया. अब बिना नक्शा पास कराए बने कई मकानों और भवनों को कानूनी मान्यता मिल सकेगी. नगर विकास विभाग ने इसके लिए बिल्डिंग प्लान अप्रूवल मैनेजमेंट सिस्टम यानी BPAMS पोर्टल लॉन्च किया है. इस पोर्टल के जरिए लोग अपने भवन के नियमितीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे.
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Ranchi: रांची में गुरुवार को राज्य सरकार ने लाखों भवन मालिकों को बड़ी राहत देने वाला फैसला लिया. अब बिना नक्शा पास कराए बने कई मकानों और भवनों को कानूनी मान्यता मिल सकेगी. नगर विकास विभाग ने इसके लिए बिल्डिंग प्लान अप्रूवल मैनेजमेंट सिस्टम यानी BPAMS पोर्टल लॉन्च किया है. इस पोर्टल के जरिए लोग अपने भवन के नियमितीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे.

 

नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि राज्य में लंबे समय से लोग अपने मकानों को वैध कराने की मांग कर रहे थे, लेकिन पहले इस दिशा में कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी. अब पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और आसान बनाया गया है ताकि आम लोगों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें. सरकार का दावा है कि इस फैसले से करीब 7 लाख भवन मालिकों को फायदा होगा.

 

सरकार की ओर से आवेदन के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया है. इस अवधि के भीतर भवन मालिक पोर्टल पर आवेदन जमा कर सकेंगे. आवेदन मिलने के बाद विभाग 6 महीने के अंदर जांच पूरी कर अंतिम फैसला करेगा. इसके बाद योग्य भवनों को नियमित कर दिया जाएगा.

 

योजना के तहत सिर्फ उन्हीं भवनों को राहत मिलेगी जो तय मानकों के अंदर आते हों. विभाग के अनुसार अधिकतम 300 वर्ग मीटर तक के भवन इस स्कीम में शामिल किए गए हैं. भवन की ऊंचाई 10 मीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए और निर्माण G+2 तक ही मान्य होगा. निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद पात्र भवन मालिक अपने निर्माण को वैध करा सकेंगे.

 

नगर विकास सचिव सुनील कुमार ने कहा कि यह लोगों के लिए एक तरह का अंतिम मौका है. वहीं, सूडा निदेशक सूरज कुमार ने बताया कि पोर्टल को तकनीकी रूप से तैयार कर लिया गया है और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित होगी.

 

सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि हर अवैध निर्माण को नियमित नहीं किया जाएगा. सरकारी जमीन, सार्वजनिक उपक्रम, आवास बोर्ड और वक्फ बोर्ड की जमीन पर बने भवनों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा.

 

इसके अलावा जलग्रहण क्षेत्र, टैंक बेड, पार्किंग स्थल और अतिक्रमण वाली जमीनों पर बने निर्माण भी दायरे से बाहर रहेंगे. सीएनटी और एसपीटी एक्ट के उल्लंघन वाले मामलों के साथ-साथ कोर्ट में विवादित भवनों को भी इस योजना में शामिल नहीं किया गया है.

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