Ranchi : झारखंड प्रदेश के करीब 80 हजार रसोइया/संयोजिका/अध्यक्ष संघ ने मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग से मानसून सत्र के शुरू होने से पहले रसोइयों की मांग पूरी करने की मांग की. संघ ने कहा कि राज्यभर में अप्रैल महीने से मानदेय नहीं मिल रहा है. इसकी वजह से रसोईयों को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है. संघ के प्रदेश अध्यक्ष अजीत प्रजापति ने बताया कि हजारीबाग के डाड़ी प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय कठेरवा की रसोइया सुमित्रा देवी को वर्ष 2024 का करीब 16 हजार रुपया अब तक नहीं मिला है.
वहीं, राज्य के अधिकांश रसोइयों का 2024 का एक-एक हजार रुपया नहीं मिला है. खूंटी जिले के रसोइयों को वर्ष 2020 का 5500 रुपये तक का मानदेय भी नहीं मिला है. संघ ने सभी लंबित भुगतानों की जांच कर जल्द से जल्द एकमुश्त भुगतान कराने की मांग की है. संघ ने ने बताया कि 60 साल की उम्र पूरी होने पर रसोइयों को सेवानिवृत्ति के समय तीन महीने का अतिरिक्त मानदेय दिया जाए.
इसके साथ ही, लंबे समय तक सेवा देने वाले रसोइयों के परिवार के एक सदस्य को स्कूल में रोजगार देने की व्यवस्था की जाए. रांची के इटकी प्रखंड के मुकुंदा मध्य विद्यालय की रसोइया मीना देवी का मामला भी उठाया गया. संघ ने बताया कि वर्ष 2018 में उन्हें काम से हटा दिया गया था. अधिकारियों के निर्देश के बावजूद आज तक उन्हें दोबारा काम पर नहीं रखा गया.
रसोइया संघ ने आरोप लगाया कि कई स्कूलों में मध्यान्ह भोजन से जुड़े काम, जैसे खाद्यान्न खरीदना और रिकॉर्ड रखना, नियमों के खिलाफ प्रधानाध्यापक और शिक्षक कर रहे हैं. जबकि यह जिम्मेदारी संयोजिका और अध्यक्ष की होती है. संघ ने इस पर रोक लगाने की मांग की है.
इसके अलावा सभी स्कूलों में अग्निशामक यंत्र लगाने, मध्यान्ह भोजन योजना के लिए समय पर चावल और राशि उपलब्ध कराने की मांग की है. जिन स्कूलों में खाद्यान्न या पैसे की कमी है, वहां तुरंत व्यवस्था करने की मांग भी की गई है. संघ ने मुख्यमंत्री और शिक्षा सचिव से मानसून सत्र से पहले प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक करने की मांग की है.
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