Ranchi: जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (DRDA) में कार्यरत गैर सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त नहीं होगी. उनकी सेवा जिला परिषद को हस्तांतरित कर दी जायेगी. जिला परिषद में उनकी सेवा शर्तें भी DRDA के अनुरूप ही रहेंगी. कैबिनेट की सहमति के दो साल बाद ग्रामीण विकास विभाग ने DRDA का पंचायती राज में विलय के फैसले से संबंधित आदेश जारी किया है.
विलय के बाद DRDA के कर्मचारी जिला परिषद में गठित विकास शाखा में काम करेंगे. DRDA में संविदा पर नियुक्त कर्मचारियों की सेवा शर्तों में जिला परिषद में कार्य करने के दौरान किसी तरह का बदलाव नहीं होगा. विलय के बाद जिला परिषद में कार्यरत DRDA के कर्मचारियों को जूनियर माना जायेगा, भले उनका मानदेय कुछ हो. उन्हें जिला परिषद विलय के बाद भी DRDA में कार्यरत रहने के दौरान लगे आरोपों पर विभागीय कार्यवाही संविदा कर्मियों के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत जारी रहेगा.
DRDA के लिए सृजित पद ग्रामीण विकास विभाग के अधीन होगा. लेकिन DRDA के लिए सृजित रिक्त पदों पर नियुक्ति नहीं की जायेगी. ग्रामीण विकास विभाग द्वारा चलायी जा रही योजनाओं जैसे NRLM,JOHAR, NREP, जल छाजन, विधायक योजना आदि के मॉटरिंग की जिम्मेवारी जिला परिषद में कार्यरत विकास शाखा की होगी. विकास शाखा उपायुक्त के नियंत्रण में काम करेगी.
DRDA की स्थापना 1980 में हुई थी. इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र में चलने वाली केंद्रीय योजनाओं को लागू किया जाता था. इन योजनाओं को लागू करने के लिए DRDA में तृतीय व चतुर्थ वर्ग के पदों पर प्रबंध पर्षद के माध्यम से नियुक्ति की गयी थी.
राज्य के 24 जिला ग्रामीण विकास अभिकरणों में कुल 1137 पदों का सृजन किया गया था. फिलहाल इन पदों मे से सिर्फ 380 पर ही कर्मचारी कार्यरत हैं. इन कर्मचारियों को सरकारी सेवकों के समान महंगाई भत्ता आदि की सुविधा मिलती थी.
इन कर्मचारियों की सेवानिवृति उम्र 60 साल निर्धारित है. लेकिन उन्हें सेवानिवृति लाभ के रूप में कोई राशि नहीं मिलती है. केंद्र सरकार ने DRDA प्रशासन बंद करने के साथ ही कर्मचारियों के समायोजि का सुझाव दिया था. इसी के अनुरूप राज्य सरकर ने यह फैसला किया है.
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