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Jharkhand News: Snake Bite के मामलों में लगातार इजाफा, 4 साल में 9 हजार से ज्यादा केस

Ranchi: झारखंड में सांप काटने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 से अब तक सर्पदंश के 9,438 मामले सामने आए हैं. बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को राष्ट्रीय सर्पदंश प्रबंधन प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है.
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Ranchi: झारखंड में सांप काटने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 से अब तक सर्पदंश के 9,438 मामले सामने आए हैं. बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को राष्ट्रीय सर्पदंश प्रबंधन प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है.

 

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में राज्य में सांप के काटने के 392 मामले दर्ज किए गए थे. वर्ष 2023 में यह संख्या बढ़कर 1,647 हो गई, जिसमें 15 लोगों की मौत हुई. वर्ष 2024 में 2,760 मामले सामने आए और 22 लोगों की जान गई. वहीं वर्ष 2025 में 4,078 मामले दर्ज किए गए, जबकि 26 लोगों की मौत हुई. अप्रैल 2026 तक राज्य में सर्पदंश के 561 मामले सामने आ चुके हैं.

 

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि सभी सिविल सर्जनों को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से तय राष्ट्रीय सर्पदंश प्रबंधन प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. उन्होंने बताया कि सरकार ने हाल ही में सर्पदंश और उससे होने वाली मौतों को अधिसूचित रोग घोषित किया है.

 

राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र की राष्ट्रीय कार्य योजना के तहत वर्ष 2030 तक सांप के काटने से होने वाली मौतों और विकलांगता के मामलों में 50 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि झारखंड में पाई जाने वाली 250 से अधिक सांप प्रजातियों में केवल 25 प्रतिशत ही विषैले हैं.

 

स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह भी सामने आया है कि अस्पताल पहुंचने में देरी और समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण कई लोगों की जान चली जाती है.


शशि प्रकाश झा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग झाड़-फूंक, तांत्रिक और जड़ी-बूटी जैसे अंधविश्वासों का सहारा लेते हैं. उन्होंने लोगों से अपील की कि सांप काटने के बाद तुरंत अस्पताल पहुंचें और इलाज में देरी न करें.

 

स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला अस्पतालों, उपमंडल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों में एंटी स्नेक वेनम सीरम की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. विभाग ने इस दवा को आवश्यक दवाओं की सूची में भी शामिल कर लिया है.

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