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Jharkhand News: डिस्ट्रिक्ट जेलों में दमघोंटू स्थिति, क्षमता के मुकाबले 114% तक पहुंचा कैदियों का दबाव

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की ओर से जारी 'प्रिजन स्टैटिस्टिक्स इंडिया 2024' की रिपोर्ट ने झारखंड की जेल व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर किया है. रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की जिला जेलें इस समय 'ओवरक्राउडिंग' (अत्यधिक भीड़) के संकट के कारण दमघोंटू स्थिति से जूझ रही हैं, जहां कैदियों की संख्या निर्धारित क्षमता को पार कर 114.1 प्रतिशत तक पहुंच गई है.
 

Ranchi : नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की ओर से जारी 'प्रिजन स्टैटिस्टिक्स इंडिया 2024' की रिपोर्ट ने झारखंड की जेल व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर किया है. रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की जिला जेलें इस समय 'ओवरक्राउडिंग' (अत्यधिक भीड़) के संकट के कारण दमघोंटू स्थिति से जूझ रही हैं, जहां कैदियों की संख्या निर्धारित क्षमता को पार कर 114.1 प्रतिशत तक पहुंच गई है. 

 

झारखंड की 16 जिला जेलों की कुल क्षमता 4,976 कैदियों की है, लेकिन वर्तमान में यहां 5,680 कैदी ठूंसे हुए हैं. यह स्थिति न केवल मानवाधिकारों के लिहाज से चिंताजनक है, बल्कि जेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती बनी हुई है. क्षमता से अधिक कैदी होने के कारण आमतौर पर कैदियों के बीच झड़पें, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और सुरक्षा चूक की संभावना अधिक रहती है.


न्यायिक प्रक्रिया की सुस्ती से 69% कैदी अंडरट्रायल

रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जेलों में बंद अधिकांश आबादी उन लोगों की है, जिनका अपराध अभी साबित नहीं हुआ है. राज्य के कुल 16,201 कैदियों में से 11,232 (69.3%) अंडरट्रायल (विचाराधीन) हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि न्यायिक प्रक्रियाओं में देरी के कारण जेलों पर बोझ बढ़ रहा है. सजायाफ्ता कैदियों की संख्या मात्र 4,943 है, जो कुल आबादी का लगभग 30.5 प्रतिशत ही है.

 

सेंट्रल जेलों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर

झारखंड में कुल 32 जेल हैं जिनमें 7 सेंट्रल, 16 जिला, 7 सब-जेल, 1 बोर्स्टल और 1 स्पेशल जेल शामिल है. एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि राज्य की 7 सेंट्रल जेलों में स्थिति कुछ हद तक नियंत्रण में है. यहां 10,137 की क्षमता के मुकाबले 9,175 कैदी बंद हैं, यानी यहां ऑक्यूपेंसी दर 90.5 प्रतिशत है. वहीं, सब-जेलों (उप-कारागार) में ऑक्यूपेंसी दर मात्र 53.9 प्रतिशत है.

 

इसके बावजूद, जिला जेलों की ओवरक्राउडिंग पूरी व्यवस्था के औसत को प्रभावित कर रही है. रिपोर्ट के आंकड़ें इस ओर भी इशारा कर रहे हैं कि राज्य में नए कारागारों के निर्माण और विचाराधीन कैदियों की अदालती सुनवाई में तेजी लाने के लिए तत्काल जरूरी कदम उठाने की आवश्यकता है.

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