Ranchi : सरना धर्म और आदिवासी पहचान को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है. वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि निशा भगत सरना आदिवासियों और सनातन आस्था को एक मानती हैं, जबकि ज्योत्सना केरकेट्टा पर मिशनरी ईसाइयों के प्रभाव में होने और आदिवासी व ईसाई समुदाय को एक बताने का आरोप लगाया गया है.
पोस्ट में लोगों से सवाल किया गया कि दोनों में आदिवासियों की सच्ची हितैषी कौन है. इसके बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं. एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए लिखा कि यह सिर्फ राजनीतिक ड्रामा है और दोनों नेता अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करने के लिए सरना धर्म का इस्तेमाल कर रही हैं.
यूजर ने कहा कि सरना का अर्थ केवल प्रकृति पूजा है. सोशल मीडिया पर चल रही इस बहस के बाद आदिवासी पहचान, सरना धर्म और राजनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है. हालांकि, दोनों नेताओं की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.


Leave a Comment