- अब हर थाने में होगी Sexual Assault Kit
- FIR में लापरवाही नहीं चलेगी
- ‘बर्किंग’ पर रोक
- ई-एफआईआर के दुरुपयोग पर लगेगी लगाम
- हर संज्ञेय अपराध में FIR जरूरी, नहीं तो होगी कार्रवाई
Ranchi : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की सिफारिशों के बाद झारखंड पुलिस मुख्यालय ने राज्य में पुलिसिंग व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है. गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं.
सूत्रों के अनुसार, राज्य के सभी थानों में “Sexual Assault Examination Kit” की उपलब्धता और उसके उपयोग को लेकर विशेष जोर दिया जा रहा है. साथ ही, जमीनी स्तर पर तैनात पुलिसकर्मियों को इसके बारे में जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि यौन अपराधों की जांच में किसी तरह की लापरवाही न हो.
पुलिस मुख्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि पुलिसकर्मियों को मानवाधिकार के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए प्रशिक्षण प्रणाली को और मजबूत किया जाएगा. नए और पुराने दोनों तरह के पुलिसकर्मियों के लिए ट्रेनिंग मॉड्यूल में मानवाधिकार से जुड़े विषयों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा.
सबसे अहम मुद्दा “बर्किंग” (अपराध को दबाना या कम गंभीर धाराओं में दर्ज करना) को लेकर सामने आया है. पुलिस मुख्यालय ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए जिलों को निर्देश दिया है कि किसी भी संज्ञेय अपराध में एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है.
अगर कोई अधिकारी ऐसा करने में लापरवाही करता है या जानबूझकर मामले को कमजोर करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा ई-एफआईआर प्रणाली के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी निगरानी बढ़ाने का निर्णय लिया गया है.
पुलिस मुख्यालय ने कहा है कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सभी मामलों की नियमित समीक्षा की जाएगी. झारखंड पुलिस मुख्यालय का मानना है कि इन सुधारों के लागू होने से न सिर्फ अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी, बल्कि आम जनता का पुलिस पर भरोसा भी मजबूत होगा.
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