Ranchi : रंगों का पर्व होली पूरे झारखंड में उत्साह, उमंग और भाईचारे के साथ मनाया जाता है. गांव से लेकर शहर तक ढोल-नगाड़ों की थाप, अबीर-गुलाल की उड़ती खुशबू और मिलन की परंपरा इस त्योहार को खास बनाती है. लेकिन इसी खुशी के बीच एक कड़वी सच्चाई भी हर साल सामने आती है—लापरवाही, नशाखोरी और हुड़दंग कई परिवारों की खुशियों को मातम में बदल देते हैं.
इसी को देखते हुए झारखंड पुलिस ने इस बार साफ शब्दों में चेतावनी दी है—“होली में हुड़दंगी करने वाले हो जाएं सावधान, नहीं तो अगला मोड़ पर बैठा है यमराज.” यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि बीते वर्षों के दर्दनाक हादसों से निकली चेतावनी है.
दो साल का आंकड़ा: होली बनी हादसों का कारण
जानकारी के अनुसार होली के दिन और उसके आसपास (दो दिन पहले और एक दिन बाद भी सड़क दुर्घटनाओं और हिंसक घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि दर्ज की गई है.
दो सालों के आंकड़ों के अनुसार शराब के नशे में वाहन चलाने के 300 अधिक मामले तो शांति भंग और हुड़दंग के आरोप में 120 से अधिक गिरफ्तार हुए है. तो वहीं 103 से अधिक दुर्घटनाओं का मामला सामने आया. जिसमें करीब 180 अधिक लोग घायल हुए है, तो वहीं 50 से अधिक लोगों की मौत हुई है.
सबसे अधिक दुर्घटनाएं रांची, धनबाद, बोकारो पलामू, गढ़वा लातेहार और जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) में दर्ज की गईं. ग्रामीण इलाकों में भी बाइक स्टंट और ट्रैक्टर-ट्रॉली से गिरने के कई मामले सामने आए.
2025 में दुर्घटनाओं में करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश मौतें तेज रफ्तार बाइक, ट्रिपल राइडिंग और हेलमेट न पहनने के कारण हुईं.
नशा और रफ्तार बना सबसे बड़ा दुश्मन
झारखंड में होली के दौरान सबसे बड़ी समस्या शराब और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन के बाद वाहन चलाना है. युवा वर्ग में ‘स्टंट’ दिखाने की होड़ कई बार जानलेवा साबित होती है. कई मामलों में देखा गया है कि रंग खेलने के बाद लोग समूह में बाइक लेकर निकलते हैं और मुख्य सड़कों पर रेस लगाते हैं.
ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, होली के दिन सामान्य दिनों की तुलना में दोगुना चालान काटे जाते हैं. ब्रेथ एनालाइजर जांच में बड़ी संख्या में लोग नशे की हालत में पाए जाते हैं.
हुड़दंग से बढ़ती आपराधिक घटनाएं
होली के नाम पर जबरन रंग लगाना, महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार, गाड़ियों पर पत्थर फेंकना और डीजे की आड़ में अशांति फैलाना भी बड़ी समस्या बन रही है. पिछले दो वर्षों में दर्ज मामलों में कई प्राथमिकी छेड़खानी और मारपीट से जुड़ी रही हैं.
पुलिस का कहना है कि “बुरा न मानो होली है” का मतलब कानून तोड़ने की छूट नहीं है. त्योहार की आड़ में किसी की गरिमा या सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
जिलावार संवेदनशील इलाके
पुलिस ने रांची, धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, पलामू, हजारीबाग और पूर्वी सिंहभूम को संवेदनशील श्रेणी में रखा है. इन जिलों में अतिरिक्त पुलिस बल, दंडाधिकारी और मोबाइल पेट्रोलिंग की व्यवस्था की गई है. ग्रामीण क्षेत्रों में भी थाना स्तर पर चौक-चौराहों पर बैरिकेडिंग और सघन वाहन जांच की तैयारी है.
अस्पतालों की तैयारी
सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी वार्ड को अलर्ट मोड पर रखा गया है. रिम्स रांची और अन्य जिला अस्पतालों में अतिरिक्त डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत इलाज मिल सके.
पुलिस की अपील
नशे की हालत में वाहन न चलाएं, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग करें, जबरन रंग न लगाएं, डीजे और साउंड सिस्टम तय समय सीमा में ही चलाएं. किसी भी आपात स्थिति में 112 पर तुरंत सूचना दें.
पुलिस मुख्यालय का कहना है कि इस बार ड्रोन कैमरे से भी निगरानी की जाएगी. सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वालों पर साइबर सेल नजर रखेगी.
एक पल की मस्ती, जिंदगी भर का पछतावा
होली का त्योहार प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का प्रतीक है. लेकिन आंकड़े बताते हैं कि थोड़ी सी लापरवाही पूरे परिवार की जिंदगी बदल सकती है. जिन घरों में होली की सुबह हंसी-खुशी शुरू होती है, कई बार शाम होते-होते वहां सन्नाटा छा जाता है.
पिछले दो वर्षों में हुई 20 से अधिक मौतें सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि उन परिवारों की टूटती उम्मीदों की कहानी हैं. होली का रंग तभी सुहाना है जब वह खुशियों का संदेश दे. नशे, रफ्तार और हुड़दंग से सजी होली कभी भी सुरक्षित नहीं हो सकती.
झारखंड पुलिस का संदेश साफ है— “होली खेलिए, लेकिन होश में रहकर. क्योंकि अगर आप लापरवाह हुए, तो सच में अगला मोड़ पर बैठा हो सकता है यमराज.”
इस बार संकल्प लें कि हम खुद भी सुरक्षित रहेंगे और दूसरों को भी सुरक्षित रखेंगे. तभी सच्चे मायने में होली का रंग जीवन में खुशियां घोलेगा, मातम नहीं.
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