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हाल-ए-झारखंड पुलिस: साइबर क्राइम के मामलों की जांच में राज्य पुलिस फिसड्डी, सफलता में सबसे निचले पायदान पर

साइबर अपराध के मामलों में झारखंड पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. गृह मंत्रालय और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से जुड़े CIAR (Cyber Crime Investigation Assistance Request) मामलों की समीक्षा में झारखंड पुलिस का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा है.
 
झारखंड की खबरें

Ranchi: साइबर अपराध के मामलों में झारखंड पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. गृह मंत्रालय और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से जुड़े CIAR (Cyber Crime Investigation Assistance Request) मामलों की समीक्षा में झारखंड पुलिस का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक झारखंड की प्रतिक्रिया दर महज 34 प्रतिशत है और राज्य देश में सबसे निचले पायदान पर दिखाई दे रहा है.

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जानकारी के अनुसार, दूसरे राज्यों से साइबर अपराध से जुड़े मामलों में जांच और कार्रवाई के लिए झारखंड पुलिस को भेजे जाने वाले अनुरोधों पर समय पर कार्रवाई और सहयोग की स्थिति की निगरानी की जाती है. इसी व्यवस्था के तहत सामने आए आंकड़ों ने झारखंड पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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मामले की समीक्षा अब प्रगति पोर्टल के माध्यम से केंद्र स्तर पर भी की जा रही है. इस समीक्षा में केंद्रीय अधिकारी विभिन्न राज्यों की कार्यप्रणाली और लंबित मामलों की स्थिति देखते हैं. झारखंड के आंकड़े सामने आने के बाद यह साफ है कि साइबर अपराध जैसे गंभीर और तेजी से बढ़ते अपराध से निपटने में राज्य पुलिस की गति बेहद सुस्त है.

 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार झारखंड में साइबर अपराध से जुड़े कुल 9,229 मामले सामने आए हैं. इनमें 3,622 मामले लंबित हैं, जबकि 2,179 मामले जांच के अधीन हैं. वहीं 3,428 मामलों को पूरा किया गया है. आंकड़ों में झारखंड की प्रतिक्रिया दर 37.14 प्रतिशत और प्रतिक्रिया गुणवत्ता 74.92 प्रतिशत दर्ज की गई है.

 

साइबर अपराध की प्रकृति ऐसी है कि एक राज्य में बैठे अपराधी दूसरे राज्य के लोगों को निशाना बनाते हैं. ऐसे मामलों में अलग-अलग राज्यों की पुलिस के बीच तत्काल समन्वय और कार्रवाई बेहद जरूरी होती है. लेकिन झारखंड से जुड़े आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि दूसरे राज्यों से आने वाले साइबर अपराध संबंधी अनुरोधों पर अपेक्षित तेजी से कार्रवाई नहीं हो पा रही है.

 

सवाल यह है कि जब साइबर अपराधी तकनीक के जरिए पल भर में देश के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंच रहे हैं, तो झारखंड पुलिस की कार्रवाई इतनी सुस्त क्यों है. पुलिस लगातार साइबर अपराध पर नियंत्रण और बेहतर कार्रवाई का दावा करती है, लेकिन केंद्र स्तर की समीक्षा में सामने आए ये आंकड़े उन दावों की तस्वीर पर ही सवाल खड़ा कर रहे हैं.

साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई में केवल प्राथमिकी दर्ज करना पर्याप्त नहीं है. दूसरे राज्यों से आने वाले अनुरोधों पर त्वरित जवाब, जांच में सहयोग और समयबद्ध कार्रवाई ही पुलिस की वास्तविक क्षमता को दर्शाती है. ऐसे में झारखंड की कम प्रतिक्रिया दर निश्चित तौर पर गंभीर चिंता और आत्ममंथन का विषय है.

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